आज की सुबह मेरी मिक्सी चलाने से शुरू हुई...मुझे हरा(कूसी) केराव और प्याज जो पिसना था,मिशन था आज सुबह मम्मी और मामी के लिए जितिया व्रत का पारण बनाना.....जैसे ही मिक्सी चलाया मेरी पीठ में झुठ्ठा घुस गया....आप चौंक गए होंगे कि ये क्या हुआ ...... मेरी मम्मी ने बताया कि कभी कभी अचानक तेज जकड़न वाला दर्द हमारी पीठ या कमर में होता है जो अढाई दिन तक रहता है फिर अपनेआप ठीक हो जाता है....इसे ही झुठ्ठा कहते हैं।किसी तरह मैंने पारण का खाना बनाया और सबको पसंद भी आया।
ये झुठ्ठ तो सच साबित हो रहा था...दर्द इतना तेज था कि सांस भी नहीं ले पा रही थी।उठना-बैठना-चलना सब मुश्किल हो गया था।मेरी मौसी...जिसे मैं " मम्मी दीदी " कहती हूँ,उसने बहुत दवा बताई और लोहे का टोटका भी बताया....पर दर्द अपने चरम पर था।मेरी मम्मी दीदी " नारी " का सबसे प्यारा रूप है वो धर्म और कर्म दोनों में अव्वल है...हम तो पूजा-पाठ-व्रत आदि की हर दुविधा का समाधान उसी से पूछकर करते हैं...मम्मी कहती है कि मम्मी दीदी " पंडित जी " है हमारे घर की....
दिनभर की तकलीफ के बाद जब मैं शाम को अपने मोबाइल पर whats app status सबका देख रही थी...तो पता चला कि अभी कुछ देर पहले " इंद्रधनुष " निकला था...सबने फोटो भी डाला था......लेकिन इस दर्द के कारण मैं बाहर शाम को नहीं निकली और ' छूट गया मेरा इंद्रधनुष दर्शन '.....
मुझे बहुत अफसोस हो रहा था,मुझे प्रकृति की हर छटा देखने की प्रबल इच्छा रहती है और इंद्रधनुष देखना तो मेरा सबसे फेवरेट है....
खैर....कोई बात नहीं...हर कुछ ईश्वर पहले से तय रखता है कि क्या उसे देखना है और क्या नहीं....हम तो बस फिल्म " मेरा नाम जोकर " वाली लाइन....' हम सब तो रंगमंच की कठपुतली हैं '....
अभी भी जब मैं ब्लॉग लिख रही हूँ,तब भी बहुत दर्द हो रहा है पर क्या करें...कमिटमेंट भी कोई चीज होती है....ब्लॉग लिखना मेरा काम है जिसे मुझे हर हाल में करना है....मैं जानती हूँ मेरा ब्लॉग नया है,फॉलोअर न के बराबर हैं...पर फिर भी काम तो काम है....
आज इस दर्द के साथ एक और बात हुई....मेरे घर का पेंटर आया और बोला कि कल मेरे पैर पर पलंग गिर गया था...इसलिए चोट बहुत लग गई है और वो आज काम नहीं कर सकता है...ये बोलकर जब वो जा रहा था तो उस समय भी उसके मुँह में गुटखा था....मैंने यही सोचा कि " अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाली कहावत " सच हो रही है...लेकिन इसका एहसास उस पेंटर को नहीं है....जबतक एहसास होगा,तबतक कैंसर हमला कर चुका होगा।
आज मेरे छोटू( बिल्ला) की तबियत भी ठीक नहीं है...बार बार उल्टी हो रही है...दवा दिए है...थोड़ा आराम हुआ है...छोटू बीमार पड़ता है तो मेरा घर ही सूना पड़ जाता है वो मुस्कुराहट है हमारे घर का....
चलिए...फिर कल मिलते हैं...अभी दर्द बहुत तेज हो रहा है...
------ अनुगुंजा












