एक दिन
मैंने देखा कि एक नन्ही सी चींटी
एक बाल्टी पानी में गिर गई थी और वो अपने हाथ पैर
चलाकर उस पानी से निकलने की कोशिश कर रही थी।ये सब देख मुझसे रहा नहीं गया और मैंने पानी में एक
चम्मच को डाला, ये सोचकर कि उस चम्मच पर चढ़ कर वो चींटी बाहर आ जाएगी।लेकिन मेरी इंसानी सोच को उस चींटी ने गलत साबित
किया और वो उस चम्मच के सहारे बाहर नहीं आई।मगर उसने हिम्मत नहीं हारी,अपना हौसला नहीं खोया
और अपने विश्वास को टूटने नहीं दिया।वो लगातार कोशिश करती रही ,कभी किनारे तक पहुँच कर ,वो वापस पानी में चली जाती थी।तभी मैंने देखा कि उसने अपने शरीर को हवा के रूख के विपरीत कर लिया और फिर हवा के झोंके तले,वो छोटी
चींटी पानी से बाहर आ गई।इस कुछ मिनट के घटना चक्र में उस चींटी ने बहुत कुछ
सीखा दिया।उसने ये बता दिया कि हमारी हार तभी होती है जब हम
हार मानते है।

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