मंगलवार, 28 सितंबर 2021

सोने की जितिया

 कल रात की हल्की बारिश के साथ ही आज की सुबह सुहावनी थी...धूप तो तेज थी पर गर्मी का एहसास कम हो रहा था।आज मेरे भाई ने अपने दफ्तर से छुट्टी ले रखी थी,इसलिए आज सुबह की " चाय की चुस्की " का मजा ही कुछ और था...यानि मम्मी,पापा,हम,छोटू और भाई सब एकसाथ मिलकर आराम से चाय का आनंद लिया...बहुत मस्त रही सुबह की शुरूआत।

मम्मी ने मुझे बताया कि आज जितिया व्रत का नहाय-खाय है,इसलिए मम्मी का मैंने सरसों के खरी लगाकर बाल धो दिया...मेरी मम्मी का दोनों घुटना खराब हो चुका है,आस्टो अर्थराइटिस के कारण...बिलकुल मुड़ता नहीं है घुटना,इसलिए मैं ही मम्मी का बाल धो देती हूँ।नहाने के बाद जो व्रत करती हैं वो मरूआ का रोटी,नोनी की साग और झिगुनी का सब्जी खाती हैं....लेकिन मैंने ये सब नहीं बनाया,क्योंकि मेरी मामी ने ये सब भेज दिया था,मेरी मामी हर काम में " ए वन " है....वो हर समस्या को पल भर में दूर कर देती है...मैं उन्हें अपने परिवार की " इंदिरा गांधी " मानती हूँ,उनके बिना हमारा परिवार अधूरा है। अरे!!!! एक बात तो बताना ही भूल गई,खाना खाने से पहले पैर रंगा जाता है,मतलब नेलपॉलिश लगाई जाती है.....कल दिनभर मेरी मम्मी न कुछ खाएगी और न पिएगी....परसो सुबह ही वो अपना व्रत खोलेगी,वो भी चावल,झूड़ी,हरा केराव के गोदला ( सब्जी) के साथ....

बहुत कठिन व्रत होता है " जितिया "...मेरी मम्मी की तबियत ठीक नहीं रहती है पर फिर भी वो व्रत करती है....मेरी मम्मी के इस हौसले को मैं प्रणाम करती हूँ।

मेरे घर काम करने वाली बाई ने बोला मेरी मम्मी को कि           " दीदी...बिहान सोना के जितिया( गले में पहनने वाली ) पहनब,काहे की पुत्र के माय सोना के जितिया पहनई छई "....मैंने उस बाई से बोला कि क्यूं  केवल बेटा की माँ ही सोने का जितिया क्यों पहनेगी,बेटी की माँ क्यों नहीं? उसने बोला कि " बेटी के लेल ई व्रत न होए छई,खाली बेटा के लेल "...मैंने उसे बहुत समझाया कि आज बेटा-बेटी दोनों बराबर हैं...लेकिन वो नहीं मानी,मानों पुरानी बीमार सोच से वो जकड़ी हुई थी।

इसके बाद मेरी बाई जाते जाते बोली कि " बेटी के लेल पहने के हई त...चांदी के जितिया मम्मी के बोलू पहने के ".... ये क्या बात हुई बेटा के लिए सोना और बेटी के लिए चांदी....किस युग में जी रहे हैं हम...जहां बेटी कल्पना चावला बनकर अंतरिक्ष तक पहुंच जाती है...वहां बेटी का ये हाल !!!!!! 

मैंने जब गुगल पर सर्च किया इस जितिया व्रत के बारे में,तो कहीं पर भी मुझे ये नहीं मिला कि ये केवल बेटे के लिए किया जाता है...हर जगह संतान के लम्बी आयु की चर्चा की गई थी...और संतान तो बेटा- बेटी दोनों होता है,इस व्रत को     जीवित्पुत्रिका कहते हैं....जैसा शब्द से लग रहा है कि इसमें पुत्री का जिक्र है.....फिर ये बीमार सोच किसने डाली दिमाग में???? कौन है दोषी???? 

मेरे हर सवाल का जवाब मेरी मम्मी ही होती है...मेरी मम्मी ने मुझे समझाया कि पहले के जमाने में ज्यादातर केवल बेटा ही काम करने घर से बाहर जाता था,बेटी घर में रहती थी...इसलिए ऐसी सोच बनी की केवल बेटे के जीवन की रक्षा के लिए जितिया व्रत माताओं को रखना चाहिए....आज समय बदल चुका है अब बेटी...बेटों से बहुत आगे निकल चुकी है,बेटी अपनी काबलियत हर क्षेत्र में साबित कर चुकी है....इसलिए अब " बेटा-बेटी " दोनों के लिए...." सोने की जितिया "....

मेरी मम्मी के उत्तर ने मेरे मन को शांत किया....लेकिन हमें       " मेरे घर में काम करने वाली बाई " जैसी सोच वाले लोगों की सोच को बदलने की कोशिश करनी चाहिए....मैं तो ये कोशिश जरूर करूंगी...आखिर हम से ही तो समाज बनता है....

चलिए मिलते हैं कल....एक नई सुबह लेकर....

----- अनुगुंजा





10 टिप्‍पणियां:

  1. Meri mummy to ghar me jitne log hai aur jitne janwar hai sb ke liye krti hai ,,, sb ko prasad deti hai aur sb ke lambi aau ki kamna karti hai ...
    Maine is baar specially leo ke liye bhi bola hai .

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  2. Pr meri mummy ke pass koi sone ya chandi ki jitiya nahi hai....

    Tmhari kahani padh ke maine v socha hai ki agle baras mai uno sone ki jitiya dila dungi.

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  3. वाह!!!बहुत खूब....ऐसी ही सबकी सोच होनी चाहिए..

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  4. उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद....रोज पढ़े मेरे ब्लॉग और शेयर करें...ये विनम्र निवेदन है

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  5. हमारे यहां कोई सोने या चांदी की जितिया नहीं पहनी जाती । पहले बाल विवाह होते थे इसलिए बेटियां बचपन में ही ब्याह कर पराई हो जाती थीं इसलिए लोग बेटों के लिए ही ये व्रत रखते थे अब सब कुछ बदल चुका है

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  6. हां....समय जरूर बदला है पर अभी भी जींस-टॉप पहनकर भी सोच बरसो पुरानी है जिसे हम दकियानुसी विचार कहते हैं....हमें कोशिश ये करनी होगी कि लोगों की सोच बदले

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  7. उत्तर
    1. आपका बहुत धन्यवाद...कृपया मेरे blog का लिंक अपने परिवार में जरूर शेयर करें।मैं रोज blog लिखती हूँ।

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