सोमवार की सुबह बहुत तेज धूप के साथ शुरू हुई,उमस भरी गर्मी मन की जमीन को तपिश का एहसास करा रही थी।चाय के बाद दिनचर्या रोटी-आलू का भूजिया वाले नास्ते के साथ आगे बढ़ी....दोपहर के खाने में आज मम्मी कद्दू की सब्जी बना रही है वो भी धनिया के पत्ते के साथ,जैसा की मुझे पसंद है।
कल " बेटी दिवस " था...whats app के status पर सब अपनी बेटी के साथ वाली फोटो लगा रहे थे...कुछ तो वीडियो भी डाल रहे थे...मानों तीज-त्योहार की तरह ये एक प्रथा बन गई है कि जो " डे " हो,उसके अनुसार फोटो डालो प्रतियोगिता होनी ही चाहिए...मुझे इसमें कोई बुराई नहीं दिखती,बल्कि अपने रिश्तों के प्यार को थोड़ा प्रकट करना अच्छा लगता है।
मेरी मम्मी को स्मार्ट फोन इस्तेमाल करना नहीं आता है,ये जानते हुए भी मम्मी से थोड़ा मजाक करने के इरादे से मैं पूछी कि आज ' बेटी दिवस ' है तुमने क्या किया मेरे लिए? फोन पर मेरी फोटो भी नहीं डाली...तुमको जरा भी " पुत्री मोह " नहीं है....
ये सुनकर मम्मी थोड़ा मुस्कुराई और बोली कि आज मेरे पैर के घुटने के अर्थराइटिस का दर्द बहुत चरम पर था,पर जब सब्जी वाली कद्दू लाई तो हम यही सोचे कि ये तुमको अच्छा लगेगा...हम नहीं जानते थे कि आज बेटियों का दिन है,मेरे लिए तो हर पल बेटियों का होता है...उसके बाद जो मम्मी बोली वो सुनकर मैं नि:शब्द रह गई...मम्मी ने बोला कि ' मोह ' स्वार्थ का प्रतिक है इसलिए ये बेटों के हिस्से जाता है जिसे " पुत्र मोह " कहा जाता है...मगर बेटियां तो परमार्थ का प्रतिक है,जीवन के आधार का प्रतिक है और नि: स्वार्थ प्रेम का प्रतिक है...इसलिए " पुत्री मोह " नहीं होता.....
आज मम्मी की बात सुनकर मेरे आँखों से आंसू निकल आए....जीवन हर दिन हमें हमेशा कुछ न कुछ सिखाता रहता है ,लेकिन मेरे जीवन में पाठ मेरी मम्मी ही सिखाती है.... एक बार फिर से मम्मी ने जीवन को दर्शन दिया।
Thank you Mummy
------ अनुगुंजा
मेरी बनाई पेंटिंग.....

बेटियाँ तो दिल मे रहती हैं, उनके प्रति मोह व्यक्त करने की क्या जरूरत है.
जवाब देंहटाएंजी...मेरी मम्मी ने भी यही कहा
जवाब देंहटाएंWah Annu bahut accha likhti ho..
जवाब देंहटाएंItne bariki se hr moment ko catch kr ke likhna ...........
Wah wah wah wah
बहुत बहुत धन्यवाद रानी...शेयर करना मेरा ब्लॉग
जवाब देंहटाएंAmazing
जवाब देंहटाएंThank you,please share
हटाएं