गुरुवार, 20 जनवरी 2022

Hindi blog (ठंड बढ़ गई)

 

जनवरी के मौसम में तो ठंड रहती ही है,ये तो बहुत सामान्य कही जाने वाली बात है....लेकिन जब हम पिछले साल की तुलना करते हैं तो पाते हैं कि साल 2021 में तो बहुत कम ठंड पड़ी थी,मुझे याद है हमने एक दिन भी रूम हीटर या लकड़ी नहीं जलाई थी....हमारा शरीर इतना बड़ा फेरबदल सहन नहीं सकता है...यही कारण है कि आज घर-घर लोगों को तेज सर्दी-खांसी-बुखार हो रहा है और खांसी तो ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही है। 

गैस का चूल्हा भी जलाकर हम अपने हाथों को सेक रहे हैं,ताकि हाथों में थोड़ी गर्मी आए,क्योंकि थोड़ी थोड़ी देर पर हमारा हाथ बर्फ की तरह ठंडा हो रहा है,एकदम जकड़ जा रहा है।
पैर का तलवा तो ऐसा लगता है कि मानो हम बर्फ के सिला पर चल रहे हो, ये भी ठंड से अकड़ रहा है....एक मोजा कौन कहे, यहाँ तो दो-दो मोजा पहनने की नौबत आ गई है।
धूप तो दर्शन भी नहीं दे रही थी, पर कल से धूप लूकाछुपी का खेल खेल रही है...ये धूप थोड़ी भी गर्मी नहीं दे रही है,शायद बादल के कारण धूप कमजोर पड़ गई है....हमारे शहर का न्यूनतम तापमान पांच डिग्री तक चला गया था.....इसी से ठंड के कहर का एहसास हो जाता है।

कोरोना भी कायम---
ठंड के साथ-साथ कोरोना भी कायम है, लोगों की लापरवाही भी कायम है....बाजार में लोगों की भीड़ बेफिक्र नजर आ रही है,न कोई मास्क लगा रहा है और न दो गज दूरी.....इससे डर है कि कहीं ये अनदेखापन हमारे शहर के लिए जानलेवा न बन जाए....और फिर से मौत आतंक फैलाए।

सादा भोजन उच्च विचार

आज मम्मी ने बहुत सादा खाना बनाया पर बहुत अच्छा लगा....कभी-कभी सादगी भी बहुत अच्छी लगती है। लगातार मसालेदार खाना खाने से हमारी जुबान और स्वास्थ्य दोनों बुरी तरह प्रभावित होता है और बीमारी पैर पसारती है।

गैस के सिलेंडर से रिसाव

कल हमने नया गैस सिलेंडर लगाया था,और कल रात अचानक पूरे घर में गैस का रिसाव फैल गया,मैं तुरंत दौड़ी और गैस सिलेंडर के रेगुलेटर को बंद किया...फिर मामी को बुलाया पर जब उनसे भी समस्या दूर नहीं हुई,तो मामी ने ही गैस-चूल्हा ठीक करवाने वाले को बोला, वो जब आए...तो बोला कि सिलेंडर के वासर में कोई दिक्कत है....बड़ी मुश्किल से उन्होंने समस्या दूर की।

हमें हमेशा सजग और तत्पर रहने की जरूरत होती है वरना कोई दुर्घटना घट जाती है। अगर हम सबने सावधानी नहीं बरती होती, तो हो सकता है गैस का रिसाव पूरे घर में फैल जाता और कोई भयानक दुर्घटना हो जाती।

तो बस आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलते हैं...

---- अनुगुंजा



रविवार, 16 जनवरी 2022

Hindi blog based on Corona

कोरोना की कहानी......सफर जारी



 फिर आता है 2019 का नवंबर का महीना, जब शायद पहली बार पूरी दुनिया ने चीन में बनाए गए corona virus या covid-19 के बारे में सुना था। उस समय तक हमें यही लगता था कि कहाँ चीन china और कहाँ भारत india, ये वायरस इतनी दूरी तय करके थोड़े हमारे पास आएगा।हम सुन रहे थे कि ये वायरस बहुत तेजी के साथ दूसरे देशों में भी फैल रहा है पर फिर भी हम निश्चिंत होकर अपने घरों में बैठे थे।

साल 2020 के जनवरी में पहला कोरोना केस आया-
साल 2020 के जनवरी महीने में केरल में कोरोना covid-19 का पहला केस सामने आया,तब हमें हल्का-सा डर लगा कि      " अरे!!!! ये वायरस तो भारत में प्रवेश कर गया "                   फिर शुरू हुआ corona लक्षण और कारण के सामने आने का सिलसिला, तब यही बोला गया कि ये कोरोना वायरस india में अंतरराष्ट्रीय विमान से विदेशों से आए यात्रियों से प्रवेश किया है।

मोबाइल के रिंगटोन में खांसी की आवाज़--

साल 2020 के जनवरी में भारत में कोरोना का पहला मामला आने के बाद ये वायरस अपना पैर दूसरे राज्यों में भी फैलाने लगा। तब हमारी मोदी सरकार ने बहुत जागरूकता और तत्परता से काम लिया, जब भी हम मोबाइल से किसी को कॉल लगाते तो रिंग की जगह " खांसी " की आवाज़ आती और कोरोना के लक्षण,कारण और बचाव के बारे में मैसेज दिया जाता,ताकि हिन्दुस्तान की जनता सावधान हो जाए इस वायरस से।

2020 के मार्च में लगा देश का पहला लॉकडाउन--
अभी तक हमने सिर्फ सुना था " लॉकडाउन " जैसे शब्द के बारे में, वो भी ये कि अमेरिका america(US) , इटली , ब्राजिल आदि देशों ने लगाया  ' लॉकडाउन ' , पर सोचा न था भारत की 130 करोड़ की आबादी भी यह दहशत झेलेगी। मार्च में लगे    " जनता कर्फ्यू " और फिर Lockdown ने हमारी पूरी जिन्दगी ही बदल दी.,जो आजतक जारी है। इस लॉकडाउन में भारत india ने देखी सूनी सड़के,खामोश गलियाँ,सुनसान घर के गेट की ताला लटकी तस्वीर को...राहों पर बस धूल ही उड़ती दिख रही थी...सड़कों पर भटकने वाले जानवर भूख के मारे मर रहे थे,कुत्ते रात की जगह दिन में ही चिल्ला चिल्ला कर रो रहे थे...सब बहुत खौफनाक था। लोग अपनी आर्थिक समस्या को अपनी सजा मानकर स्वीकार कर रहे थे.,घरेलू अपराध भी बढ़ते जा रहे थे...कहीं कुछ भी ठीक नहीं था।
Lockdown 1,2,3 के बाद unlock का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे धीरे lockdown का ताला unlock की चाभी से खुलना शुरू हुआ।जनजीवन धीरे धीरे सामान्य हो रहा था...पर इस सबमें वायरस के कारण मौत के आकड़ों से नजर नहीं फेर सकते हैं...ऐसा लगता था कि भारत के हर घर में कोरोना से मौत हो रही है,चारों तरफ भागते एम्बुलेंस का सॉयरन "मौत की आवाज" बन गया था।
कोरोना अपना रूप बदलता गया पर समस्या वही रही, मतलब बेरोजगारी, मंदी, घाटा, नुकसान का दौर आजतक जारी है। समाज,देश के हर तबके को ये परेशानी आजतक मिल रही है।

उम्मीद करती हूँ "ओमिक्रोन" 

omicron

 अंतिम चरण हो कोरोना वायरस का,इसके बाद दुबारा ये दानव कभी अपना सिर न उठाए...हमारे देश में।

    ------ अनुगुंजा



गुरुवार, 13 जनवरी 2022

Hindi blog (मकरसंक्रांति)

 

"आसमां में उड़ने दो अपने सपनों की पतंग को,               बेफिक्र होकर देखो इसकी उड़ान को.....                        भाग्य के मांझा को लपेटे कतर्व्य की चरखी,                     सुकून की ढील छोड़ खोलों उम्मीदों की खिड़की..."

आसमान दिखा आज साफ

इधर दो दिनों की बारिश और बादल के कारण आसमान में धुंध छाया हुआ था...इसके साथ साथ ठंड भी बढ़ गई थी, पर आज सुबह से ही तेज धूप निकली और नीला आसमान हमें देखने को मिला।आज का मौसम बहुत सुहावना था....

14-15 का फेर में फंसी मकर संक्रांति---

मिथिला पंचांग कहता है कि 14 जनवरी को संक्रांति है और बनारस पंचांग कहता है कि संक्रांति 15 जनवरी को है....हम सब तो 14 जनवरी को ही संक्रांति मनाएगे...पापा आज चूड़ा,दही और लाई लेकर आ गए हैं....पहले हमारे घर में लाई बनता था पर मम्मी की तबियत को देखते हुए हम बाजार से ही लाई खरीदते हैं। सब समय समय की बात है....वक्त हमेशा बदलता रहता है और हमें भी बदलते वक्त के अनुसार बदलते रहना चाहिए,क्योंकि जो नहीं बदलता है वो कहीं न कहीं अपने आपको " पत्थर " की श्रेणी में रखता है।

कल खिचड़़ी भी बनेगी,जिसकी तस्वीर कल मैं आपसे शेयर करूंगी।

घर में सब बीमार---

आप सोच रहे होंगे कि दो दिनों से ब्लॉग क्यों नहीं आया...तो बात ये है कि घर में सब बीमार हैं सबको सर्दी,बुखार हो गया है....मुझे तो कुछ ज्यादा ही सर्दी कफ है....पर डरे नहीं...हमें कोरोना नहीं है,पापा और भाई का कोविड टेस्ट भी हुआ था,जो निगेटिव आया। मेरा बुखार तो ठीक हो गया पर कमजोरी बहुत है।

जिन्दगी का फलसफा-----

जिन्दगी बहुत अनमोल है इसका हर पल बहुत महत्वपूर्ण है। जिन्दगी जो भी खुशी हमें देती है,उसका बाहें फैलाकर हमें तहे दिल से स्वागत करना चाहिए और इस खुशी का जी भरकर आनंद लेना चाहिए। बीत चुकी बुरी बातों या यादों को भूला देना चाहिए....और आगे बढ़ना चाहिए...यही जीवन है। खासकर corona या covid19 ने ये बता दिया कि जीवन का क्या महत्व है....जो आज है,अभी है...वही जीवन की खुशी है।

----- अनुगुंजा

रविवार, 9 जनवरी 2022

बिहार में बढ़ता अपराध

 

शिक्षा और साक्षर के क्षेत्र में भले ही बिहार लगातार नीचे लुढकता जा रहा हो...पर बेरोजगारी,महिलाओं के साथ होने वाले अपराध,गुंडागर्दी,लूटपाट,डकैती,रंगदारी...आदि क्षेत्रों में ये बिना रोकटोक आगे बढ़ता जा रहा है.....जिस रफ्तार से बिहार इन क्षेत्रों में छलांग लगा रहा है उसे देखकर तो यही लगता है कि जल्द ही "बिहार" भारत का सबसे अपराध से ग्रसित राज्य बन जाएगा......तब क्या बोलेंगे यहां के सुशासन बाबू????

महिलाएं नहीं है सुरक्षित----

महिलाएं न तो गले में सोने की चेन पहनकर बेखौफ बाहर निकल सकती हैं और न ही अपने स्मार्ट फोन से बेधड़क सड़क पर बात कर सकती हैं....क्योंकि न जाने कब,कौन अपराधी चेन उड़ा कर ले जाए या फोन झपट ले..ये कोई नहीं कह सकता है...हालात बहुत खराब है,महिलाएं अपने घर की गेट पर भी खड़े होने से घबराती हैं....कितनी लड़कियाँ कॉलेज-कोचिंग जाना छोड़ देती हैं और अपने उज्जवल भविष्य के सपने को तोड़ देती हैं,क्योंकि कोई आवारा,बदमाश गुंडा उनका पीछा करता है,उनपर एसिड फेंकने की धमकी देता है....और तो और कितने बार लड़की के परिवार वाले को ही मारपीट का सामना करना पड़ता है......आप सोंच रहें होंगे,ऐसे में पुलिस क्या करती है? तो भाई!!!! पुलिस हमेशा की तरह खामोश होकर सब देखती है और फिल्मों की तरह घटना घट जाने के बाद सिर्फ खानापूर्ति के लिए आती है......

सीधी बात है अपराधी में पुलिस-कानून का कोई भय नहीं है...इसलिए अपराधी निडर हैं,बेखौफ हैं.....

दिनदहाड़े हो या रात का सन्नाटा, कब,क्या घटना घट जाए...ये कोई नहीं बता सकता है....कॉलेज का गेट हो या यूनिवर्सिटी का कैम्पस,सब जगह नशेड़ी,आवारा,अपराधी अपना जमघट लगाकर रखते हैं...जो होने वाले अपराध का सूचक होते हैं।

बिहार में क्या जंगलराज और क्या वर्तमान राज.....सब कहीं न कहीं एकसमान ही दिखते हैं....

बिहार में न तो प्रतिबंध का कोई असर पड़ता है और न ही कोई सावधानी दिखती है कोरोना को लेकर....प्रशासन,पुलिस और जनता सब दोषी हैं बिहार की इस दुर्गति का।

" कौन कहता है कि अमन-चैन होते हैं,

 एक बार बिहार आकर देखो....

विकास की बातें बंद शीशी का जिन्न है,

जो कल्पना की दुनिया में मिले....

नियम-कानून क्या होता है बिहार में,

जनता के आंसू कई राज खोले.... "

------ अनुगुंजा



शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

जाड़े की धूप

 

" जाड़े की धूप " पर बहुत-सी फिल्मों में गाने लिखे जा चुके हैं, बहुत से कवि ने अपनी कविता में भी इसका जिक्र किया है....आखिर ये विषय इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

हर इंसान को उसके जीवन में बहुत थपेड़े खाने पड़ते हैं, वो बार-बार गिरता है फिर उठता है...ये क्रम चलता ही रहता है।लगातार मिलती असफलता और नाकामयाबी से मनुष्य कहीं न कहीं, कभी न कभी थक जाता है और उसे चारों तरफ सिर्फ नकारात्मकता का अंधेरा ही दिखाई देता है.....ये परिस्थिति लगभग सभी के साथ होती है, ऐसे में जरूरत होती है               " एक उम्मीद की "..." हौसले की ".....,जो आशा की नई किरण बनकर हमारे जीवन में प्रवेश करती है..ठीक वैसे ही जैसे " कड़ाके की ठंड में निकली धूप की गर्माहट "......

जब सब जगह ठंड से जम जाती है, इंसान घर में भी ठंड से थरथर कांपता है और तब जब सूर्यदेव गर्मी हमें धूप के रूप में मिलती है तो हमें ठंड से बहुत राहत मिलती है। धूप की गर्मी से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है....और हमारी जीवनचार्या वापस पटरी पर लौट आती है। 

यही कारण है कि " जाड़े की धूप " का इतना महत्व है...ये उम्मीद देती है कि आज का अंधेरा कल नहीं रहेगा,कल सुबह होगी...उम्मीद की रोशनी सारे जहान को रौशन करेगी....और हमारी आज की असफलता, कल की सफलता में बदलेगी।

शायद इसलिए " प्रकृति हमें जीना सिखाती है "


जाड़े के मौसम में " गेंदा के फूल " बहुत खिलते हैं...तो आज हमारे छत पर भी गमले में खिला " गेंदा का फूल "....लगता है कई दिनों के बाद निकली धूप का आनंद पेड़-पौधे भी ले रहे हैं....तभी तो आज हमारे गमले में " लाल ओरूल का फूल " भी निकला था...जो इस ठंड में नहीं निकल रहा था......जाड़े की धूप से पौधे भी बहुत खुश नजर आ रहे थे....यही तो प्रकृति है....

बिहार में थम नहीं रहा है कोरोना का बढ़ता केस----

बिहार सरकार नींद से तो जागी है पर पूरी तरह नहीं.....अभी भी थोड़ी सुस्त नजर आ रही है....जिस रफ्तार से बिहार में कोरोना फैल रहा है, उस तेजी के साथ प्रशासन काम नहीं कर रहा है....अभी भी किसी चौक चौराहे पर कोई पुलिस या होमगार्ड के जवान नहीं है जो बिना मास्क वाले को रोक सके,उनसे पूछताछ कर सकें...उन्हे गंभीर चेतावनी दे सके...ऐसा कुछ नहीं हो रहा है.....बिहार सरकार अपना खानापूर्ती करने वाला रवैया दिखा रही है....ऐसे तो बिलकुल काम नहीं चलेगा और न ही कोरोना थमेगा......

इसके पहले वाले ब्लॉग में भी कह चुकी हूँ कि बिहार के लोग कोई कानून-नियम नहीं मानते है,तब तक जबतक कड़ाई के साथ सरकार इसका पालन नहीं कराती है....यहां जरूरत है कोरोना प्रोटोकॉल के विरूद्ध जाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करने का, उनसे कठोर आर्थिक दंड( जुर्माना) वसूलने का...FIR दर्ज करने का....,जब तक सरकार ये काम नहीं करेगी,तब तक बिहार में लापरवाही जारी रहेगी और बढ़ता जाएगा कोरोना

-------- अनुगुंजा
 

बुधवार, 5 जनवरी 2022

स्वागत तबाही का

हम नहीं सुधरे-----

सरकार ने चेताया, न्यूजपेपर व न्यूज चैनलों ने समझाया...और तो और हम भी सच जानते थे....पर हम नहीं सुधरे....इसका नतिजा " बिहार में विकराल होता कोरोना " के रूप में सामने आया। लगातार बिहार में कोरोना केस बढ़ते जा रहे हैं...तीसरी लहर का कहर बिहार पर बरसना शुरू हो गया है,एम्बूलेंस के सायरन की आवाज कानों में गूंज रही है...मन सोच रहा है        " पता नहीं कौन बना होगा शिकार ".....

बिहार सरकार नाइट कर्फ्यू लगा चुकी है, पार्क, स्कूल,कॉलेज,धार्मिक स्थल आदि को बंद करने का आदेश भी आ चुका है.....पर क्या ये काफी है बिहार के लिए? बिहार के लोग कानून को नहीं मानने की कसम खाकर चलते हैं फिर चाहे वो ट्राफिक नियम हो या शराबबंदी या फिर दहेज....सब नियम जानते हुए भी बेधड़क कानून तोड़े जाते हैं....ऐसे में बिहार सरकार को और सख्त कदम अपनाना होगा...जैसे---                1. बिना मास्क के चलने पर भारी जुर्माना वसूला जाए और इस नियम का पालन कड़ाई के साथ हो...न कि बिहार पुलिस के सुस्त और भ्रष्टाचार जैसा रवैया वाला काम यहां नहीं चलेगा।      2. अनावश्यक सड़क पर घूमने वाले पर सख्त पाबंदी लगे और बिहार पुलिस चौकस और तत्परता के साथ काम करें। हर चौक चौराहे पर पुलिस बल या होम गार्ड के जवानों की तुरंत तैनाती हो। इससे सड़कों पर भीड़ कम रहेगी,वरना कोरोना वाली मौत सड़कों पर नाचेगी।
3. बिहार में एक जिला से दूसरे जिला जाने वाली सीमा को सील किया जाए,ताकि कोरोना फैले नहीं।
4. सभी वाहनों( बस,ऑटो,रिक्शा आदि) पर सीमित सवारी को बैठाया जाए,जो ड्राइवर ऐसा न करें उसका ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।

अगर ऊपर के ये चार नियमों को बिहार सरकार लाती है और सख्ती के साथ कार्यवाही करती है....तो शायद बिहार मौत के आकड़ों की चोटी पर नहीं जाएगा....वरना हमारे यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था,अस्पताल काफी है बिहार में कोरोना से मौत के आकड़े को पहले पायदान पर पहुँचाने के लिए।

आज बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं....

आज की टैग लाइन रही " कोरोना का ठिकाना बना बिहार "

------ अनुगुंजा


 

रविवार, 2 जनवरी 2022

राजनीति की पतंग

 

"कहता है कौन राजनीति होती केवल सत्ता के लिए,                 ये तो हर पग पर होती अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए.....             हो चाहे खेल का मैदान या नौकरी की होड़ का,           राजनीति खेल जाती अपनी बाजी जोड़-तोड़ का....            जो नहीं है राजनीति के माहिर खिलाड़ी,वो हैं हारते,         शतरंज की इस बिसात में मामा शकुनी बन ही टिक पाते...."

आज की मेरी ये कविता आधारित है खेल जगत में होने वाले पक्षपात पर....फिर चाहे वो खेल क्रिकेट का ही क्यों न हो? जिन खिलाड़ियों ने हमें 1983 के बाद का विश्व कप " भारत " को जीतवाया था,आज वो सब कहीं न कहीं मैदान से गुम होते जा रहे हैं....इस सबके पीछे का कारण जो दिया जा रहा है वो भी पक्षपात की चादर ओढे हुए लगता है। जो खिलाड़ी                 " गुड बुक्स " में नहीं होते,वो चाहे कितने भी अच्छे खिलाड़ी क्यों न हो,उन्हें बाहर का रास्ता ही दिखाया जाता है।दुख होता है....ये हाल देखकर....

बिहार में कोरोना----

एक बार फिर से बिहार में कोरोना पैर पसारते जा रहा है और लोग लापरवाह होते जा रहे हैं....न मास्क पहन रहे हैं और न भीड़ से बचने की कोशिश कर रहें हैं...दो गज की दूरी वाली बात भी भूल चुके हैं....शायद उन्हें नहीं पता कि ये मजाक वो अपने जीवन के साथ कर रहें हैं.,जिसका परिणाम जीवन को ही भुगतना पड़ता है।

मिलकर बनाए.....छोले.....

एकता में बहुत बल होता है और इसके साथ ही साथ मिलजुलकर काम करने में बहुत आनंद आता है...आज मैंने और मेरी वर्षा भाभी ने मिलकर " छोले " बनाया....जिसका स्वाद तो अच्छा था ही पर बनाने में हमें बहुत मजा आया....

मम्मी के पैर का दर्द कम नही हो रहा है, डॉक्टर के कहे अनुसार दवा दे रहे हैं, मालिश और हीटर से सेक भी कर रहे हैं पर फायदा नहीं हो रहा है.....मम्मी बिलकुल चल नहीं पा रही है,मुझे बहुत दुख हो रहा है....मम्मी हमारे घर की आधारशीला है,जब वो ठीक होती है तो हमारा घर मुस्कुराता है.....लेकिन मम्मी के बिस्तर पकड़ते ही पूरा घर खामोश हो जाता है....आप सब भी मेरी मम्मी के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करें।

आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं....
आज की टैग लाइन रही " राजनीति का खेल "
------ अनुगुंजा


जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...