"आसमां में उड़ने दो अपने सपनों की पतंग को, बेफिक्र होकर देखो इसकी उड़ान को..... भाग्य के मांझा को लपेटे कतर्व्य की चरखी, सुकून की ढील छोड़ खोलों उम्मीदों की खिड़की..."
आसमान दिखा आज साफ
इधर दो दिनों की बारिश और बादल के कारण आसमान में धुंध छाया हुआ था...इसके साथ साथ ठंड भी बढ़ गई थी, पर आज सुबह से ही तेज धूप निकली और नीला आसमान हमें देखने को मिला।आज का मौसम बहुत सुहावना था....
14-15 का फेर में फंसी मकर संक्रांति---
मिथिला पंचांग कहता है कि 14 जनवरी को संक्रांति है और बनारस पंचांग कहता है कि संक्रांति 15 जनवरी को है....हम सब तो 14 जनवरी को ही संक्रांति मनाएगे...पापा आज चूड़ा,दही और लाई लेकर आ गए हैं....पहले हमारे घर में लाई बनता था पर मम्मी की तबियत को देखते हुए हम बाजार से ही लाई खरीदते हैं। सब समय समय की बात है....वक्त हमेशा बदलता रहता है और हमें भी बदलते वक्त के अनुसार बदलते रहना चाहिए,क्योंकि जो नहीं बदलता है वो कहीं न कहीं अपने आपको " पत्थर " की श्रेणी में रखता है।
कल खिचड़़ी भी बनेगी,जिसकी तस्वीर कल मैं आपसे शेयर करूंगी।
घर में सब बीमार---
आप सोच रहे होंगे कि दो दिनों से ब्लॉग क्यों नहीं आया...तो बात ये है कि घर में सब बीमार हैं सबको सर्दी,बुखार हो गया है....मुझे तो कुछ ज्यादा ही सर्दी कफ है....पर डरे नहीं...हमें कोरोना नहीं है,पापा और भाई का कोविड टेस्ट भी हुआ था,जो निगेटिव आया। मेरा बुखार तो ठीक हो गया पर कमजोरी बहुत है।
जिन्दगी का फलसफा-----
जिन्दगी बहुत अनमोल है इसका हर पल बहुत महत्वपूर्ण है। जिन्दगी जो भी खुशी हमें देती है,उसका बाहें फैलाकर हमें तहे दिल से स्वागत करना चाहिए और इस खुशी का जी भरकर आनंद लेना चाहिए। बीत चुकी बुरी बातों या यादों को भूला देना चाहिए....और आगे बढ़ना चाहिए...यही जीवन है। खासकर corona या covid19 ने ये बता दिया कि जीवन का क्या महत्व है....जो आज है,अभी है...वही जीवन की खुशी है।
----- अनुगुंजा
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