रविवार, 9 जनवरी 2022

बिहार में बढ़ता अपराध

 

शिक्षा और साक्षर के क्षेत्र में भले ही बिहार लगातार नीचे लुढकता जा रहा हो...पर बेरोजगारी,महिलाओं के साथ होने वाले अपराध,गुंडागर्दी,लूटपाट,डकैती,रंगदारी...आदि क्षेत्रों में ये बिना रोकटोक आगे बढ़ता जा रहा है.....जिस रफ्तार से बिहार इन क्षेत्रों में छलांग लगा रहा है उसे देखकर तो यही लगता है कि जल्द ही "बिहार" भारत का सबसे अपराध से ग्रसित राज्य बन जाएगा......तब क्या बोलेंगे यहां के सुशासन बाबू????

महिलाएं नहीं है सुरक्षित----

महिलाएं न तो गले में सोने की चेन पहनकर बेखौफ बाहर निकल सकती हैं और न ही अपने स्मार्ट फोन से बेधड़क सड़क पर बात कर सकती हैं....क्योंकि न जाने कब,कौन अपराधी चेन उड़ा कर ले जाए या फोन झपट ले..ये कोई नहीं कह सकता है...हालात बहुत खराब है,महिलाएं अपने घर की गेट पर भी खड़े होने से घबराती हैं....कितनी लड़कियाँ कॉलेज-कोचिंग जाना छोड़ देती हैं और अपने उज्जवल भविष्य के सपने को तोड़ देती हैं,क्योंकि कोई आवारा,बदमाश गुंडा उनका पीछा करता है,उनपर एसिड फेंकने की धमकी देता है....और तो और कितने बार लड़की के परिवार वाले को ही मारपीट का सामना करना पड़ता है......आप सोंच रहें होंगे,ऐसे में पुलिस क्या करती है? तो भाई!!!! पुलिस हमेशा की तरह खामोश होकर सब देखती है और फिल्मों की तरह घटना घट जाने के बाद सिर्फ खानापूर्ति के लिए आती है......

सीधी बात है अपराधी में पुलिस-कानून का कोई भय नहीं है...इसलिए अपराधी निडर हैं,बेखौफ हैं.....

दिनदहाड़े हो या रात का सन्नाटा, कब,क्या घटना घट जाए...ये कोई नहीं बता सकता है....कॉलेज का गेट हो या यूनिवर्सिटी का कैम्पस,सब जगह नशेड़ी,आवारा,अपराधी अपना जमघट लगाकर रखते हैं...जो होने वाले अपराध का सूचक होते हैं।

बिहार में क्या जंगलराज और क्या वर्तमान राज.....सब कहीं न कहीं एकसमान ही दिखते हैं....

बिहार में न तो प्रतिबंध का कोई असर पड़ता है और न ही कोई सावधानी दिखती है कोरोना को लेकर....प्रशासन,पुलिस और जनता सब दोषी हैं बिहार की इस दुर्गति का।

" कौन कहता है कि अमन-चैन होते हैं,

 एक बार बिहार आकर देखो....

विकास की बातें बंद शीशी का जिन्न है,

जो कल्पना की दुनिया में मिले....

नियम-कानून क्या होता है बिहार में,

जनता के आंसू कई राज खोले.... "

------ अनुगुंजा



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