शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

जाड़े की धूप

 

" जाड़े की धूप " पर बहुत-सी फिल्मों में गाने लिखे जा चुके हैं, बहुत से कवि ने अपनी कविता में भी इसका जिक्र किया है....आखिर ये विषय इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

हर इंसान को उसके जीवन में बहुत थपेड़े खाने पड़ते हैं, वो बार-बार गिरता है फिर उठता है...ये क्रम चलता ही रहता है।लगातार मिलती असफलता और नाकामयाबी से मनुष्य कहीं न कहीं, कभी न कभी थक जाता है और उसे चारों तरफ सिर्फ नकारात्मकता का अंधेरा ही दिखाई देता है.....ये परिस्थिति लगभग सभी के साथ होती है, ऐसे में जरूरत होती है               " एक उम्मीद की "..." हौसले की ".....,जो आशा की नई किरण बनकर हमारे जीवन में प्रवेश करती है..ठीक वैसे ही जैसे " कड़ाके की ठंड में निकली धूप की गर्माहट "......

जब सब जगह ठंड से जम जाती है, इंसान घर में भी ठंड से थरथर कांपता है और तब जब सूर्यदेव गर्मी हमें धूप के रूप में मिलती है तो हमें ठंड से बहुत राहत मिलती है। धूप की गर्मी से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है....और हमारी जीवनचार्या वापस पटरी पर लौट आती है। 

यही कारण है कि " जाड़े की धूप " का इतना महत्व है...ये उम्मीद देती है कि आज का अंधेरा कल नहीं रहेगा,कल सुबह होगी...उम्मीद की रोशनी सारे जहान को रौशन करेगी....और हमारी आज की असफलता, कल की सफलता में बदलेगी।

शायद इसलिए " प्रकृति हमें जीना सिखाती है "


जाड़े के मौसम में " गेंदा के फूल " बहुत खिलते हैं...तो आज हमारे छत पर भी गमले में खिला " गेंदा का फूल "....लगता है कई दिनों के बाद निकली धूप का आनंद पेड़-पौधे भी ले रहे हैं....तभी तो आज हमारे गमले में " लाल ओरूल का फूल " भी निकला था...जो इस ठंड में नहीं निकल रहा था......जाड़े की धूप से पौधे भी बहुत खुश नजर आ रहे थे....यही तो प्रकृति है....

बिहार में थम नहीं रहा है कोरोना का बढ़ता केस----

बिहार सरकार नींद से तो जागी है पर पूरी तरह नहीं.....अभी भी थोड़ी सुस्त नजर आ रही है....जिस रफ्तार से बिहार में कोरोना फैल रहा है, उस तेजी के साथ प्रशासन काम नहीं कर रहा है....अभी भी किसी चौक चौराहे पर कोई पुलिस या होमगार्ड के जवान नहीं है जो बिना मास्क वाले को रोक सके,उनसे पूछताछ कर सकें...उन्हे गंभीर चेतावनी दे सके...ऐसा कुछ नहीं हो रहा है.....बिहार सरकार अपना खानापूर्ती करने वाला रवैया दिखा रही है....ऐसे तो बिलकुल काम नहीं चलेगा और न ही कोरोना थमेगा......

इसके पहले वाले ब्लॉग में भी कह चुकी हूँ कि बिहार के लोग कोई कानून-नियम नहीं मानते है,तब तक जबतक कड़ाई के साथ सरकार इसका पालन नहीं कराती है....यहां जरूरत है कोरोना प्रोटोकॉल के विरूद्ध जाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करने का, उनसे कठोर आर्थिक दंड( जुर्माना) वसूलने का...FIR दर्ज करने का....,जब तक सरकार ये काम नहीं करेगी,तब तक बिहार में लापरवाही जारी रहेगी और बढ़ता जाएगा कोरोना

-------- अनुगुंजा
 

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