सरकार ने चेताया, न्यूजपेपर व न्यूज चैनलों ने समझाया...और तो और हम भी सच जानते थे....पर हम नहीं सुधरे....इसका नतिजा " बिहार में विकराल होता कोरोना " के रूप में सामने आया। लगातार बिहार में कोरोना केस बढ़ते जा रहे हैं...तीसरी लहर का कहर बिहार पर बरसना शुरू हो गया है,एम्बूलेंस के सायरन की आवाज कानों में गूंज रही है...मन सोच रहा है " पता नहीं कौन बना होगा शिकार ".....
बिहार सरकार नाइट कर्फ्यू लगा चुकी है, पार्क, स्कूल,कॉलेज,धार्मिक स्थल आदि को बंद करने का आदेश भी आ चुका है.....पर क्या ये काफी है बिहार के लिए? बिहार के लोग कानून को नहीं मानने की कसम खाकर चलते हैं फिर चाहे वो ट्राफिक नियम हो या शराबबंदी या फिर दहेज....सब नियम जानते हुए भी बेधड़क कानून तोड़े जाते हैं....ऐसे में बिहार सरकार को और सख्त कदम अपनाना होगा...जैसे--- 1. बिना मास्क के चलने पर भारी जुर्माना वसूला जाए और इस नियम का पालन कड़ाई के साथ हो...न कि बिहार पुलिस के सुस्त और भ्रष्टाचार जैसा रवैया वाला काम यहां नहीं चलेगा। 2. अनावश्यक सड़क पर घूमने वाले पर सख्त पाबंदी लगे और बिहार पुलिस चौकस और तत्परता के साथ काम करें। हर चौक चौराहे पर पुलिस बल या होम गार्ड के जवानों की तुरंत तैनाती हो। इससे सड़कों पर भीड़ कम रहेगी,वरना कोरोना वाली मौत सड़कों पर नाचेगी।
3. बिहार में एक जिला से दूसरे जिला जाने वाली सीमा को सील किया जाए,ताकि कोरोना फैले नहीं।
4. सभी वाहनों( बस,ऑटो,रिक्शा आदि) पर सीमित सवारी को बैठाया जाए,जो ड्राइवर ऐसा न करें उसका ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।
अगर ऊपर के ये चार नियमों को बिहार सरकार लाती है और सख्ती के साथ कार्यवाही करती है....तो शायद बिहार मौत के आकड़ों की चोटी पर नहीं जाएगा....वरना हमारे यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था,अस्पताल काफी है बिहार में कोरोना से मौत के आकड़े को पहले पायदान पर पहुँचाने के लिए।
आज बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं....
आज की टैग लाइन रही " कोरोना का ठिकाना बना बिहार "
------ अनुगुंजा
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