"कहता है कौन राजनीति होती केवल सत्ता के लिए, ये तो हर पग पर होती अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए..... हो चाहे खेल का मैदान या नौकरी की होड़ का, राजनीति खेल जाती अपनी बाजी जोड़-तोड़ का.... जो नहीं है राजनीति के माहिर खिलाड़ी,वो हैं हारते, शतरंज की इस बिसात में मामा शकुनी बन ही टिक पाते...."
आज की मेरी ये कविता आधारित है खेल जगत में होने वाले पक्षपात पर....फिर चाहे वो खेल क्रिकेट का ही क्यों न हो? जिन खिलाड़ियों ने हमें 1983 के बाद का विश्व कप " भारत " को जीतवाया था,आज वो सब कहीं न कहीं मैदान से गुम होते जा रहे हैं....इस सबके पीछे का कारण जो दिया जा रहा है वो भी पक्षपात की चादर ओढे हुए लगता है। जो खिलाड़ी " गुड बुक्स " में नहीं होते,वो चाहे कितने भी अच्छे खिलाड़ी क्यों न हो,उन्हें बाहर का रास्ता ही दिखाया जाता है।दुख होता है....ये हाल देखकर....
बिहार में कोरोना----
एक बार फिर से बिहार में कोरोना पैर पसारते जा रहा है और लोग लापरवाह होते जा रहे हैं....न मास्क पहन रहे हैं और न भीड़ से बचने की कोशिश कर रहें हैं...दो गज की दूरी वाली बात भी भूल चुके हैं....शायद उन्हें नहीं पता कि ये मजाक वो अपने जीवन के साथ कर रहें हैं.,जिसका परिणाम जीवन को ही भुगतना पड़ता है।
मिलकर बनाए.....छोले.....
एकता में बहुत बल होता है और इसके साथ ही साथ मिलजुलकर काम करने में बहुत आनंद आता है...आज मैंने और मेरी वर्षा भाभी ने मिलकर " छोले " बनाया....जिसका स्वाद तो अच्छा था ही पर बनाने में हमें बहुत मजा आया....
Meri mausi maa shakti ki rup hai woh bilkul thik ho jagegi pyari meri Frist love meri maa
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