गुरुवार, 11 नवंबर 2021

भोरवा अरघ(छठ पूजा)

 

हम सब सुबह चार बजे उठ गए.....जल्दी जल्दी तैयार होकर पहुँचना जो था घाट पर,भोरवा अरघ का समय जो होने वाला था....हमने न्यूजपेपर में सूर्योदय का समय सुबह छह बजकर पाँच मिनट देखा था,यानि सुबह पाँच बजे तक सबको घर के कैम्पस में बने घाट पर पहुँचना था।हम सबके घर में इस समय एक हड़बड़ी मची रहती है,फिर चाहे,जिसको नदी के घाट पर जाना हो,उसे भी और जिसे घर में बने घाट तक जाना ।सब तरफ भागदौड़ रहती है....यही तो रौनक होती है छठ की।

सुबह वाला अरघ देने के बाद,आरती हुई....और फिर व्रती(मम्मी दीदी और मामी) ने घाट से बाहर आकर सबको प्रसाद बांटा,आशीर्वाद दिया और अपने भींगे कपड़े से हम सबका चेहरा पोछकर दुआएं दी.....प्रसाद में हमें ठेकुआ,केला,अकुड़ी,चावल,बद्धी,पीपा सिंदूर से चंदन....मिला।

उसके बाद इतने लम्बे व्रत के बाद, व्रती सबने पहले अकुड़ी को निगला,फिर शरबत,चाय पिया....उसके बाद पारण किया,पारण में चावल,हरा केराव की सब्जी,आलू,परवल,बैगन और प्याज का पकौड़ा(जिसे बचका या झूड़ी भी कहते हैं)...के अलावा पनीर आदि की सब्जी या कड़ी-बड़ी भी बनता है,इसको जब व्रती लोग खाते हैं तो इसे पारण कहते हैं।तो इस तरह सम्पन्न हुआ महापर्व छठ।

हम सब बहुत थक गए थे...इसलिए घर आने पर सबने एक-एक नींद ली....और आराम किया।आज हम,भाई,मम्मी और पापा...सब मम्मी दीदी(मौसी) के घर गए,उसका आशीर्वाद लेने......वहां,मुझे एक तितली दिखी,जिसका फोटो नीचे डाल रही हूँ...इस तितली के बारे में मेरे बड़े पापा(मौसा जी) ने बहुत रोचक जानकारी दी....पहले तितली का फोटो देखे....

बड़े पापा(मौसा जी) ने बताया कि इस तितली की उम्र केवल 18 दिन की होती है पर ये तितली जहां जाती है वहां मंगल,शुभ,सुख,शांति,प्रेम फैलाती है....कितनी बड़ी बात है जिसकी आयु ही 18 दिन की है, वो जाते जाते इस संसार को कितना कुछ देकर जाती है और एहसान भी नहीं जताती है,बदले में कुछ मांगती भी नहीं.....
" इस नन्हीं-सी उड़ान को सलाम "

आज चुकी हम सब थके थे...इसलिए दोपहर के खाने में मैंने चावल का पुलाव बनाया,जिसका फोटो नीचे डालती हूँ....

पुलाव की रेसिपी----

एक घंटा पहले चावल को अच्छी तरह पानी से धो लिया और उसमें थोड़ा हल्दी मिलाकर,उसे प्लेट से ढक कर छोड़ दिया।उसके बाद कुकर में पहले कुछ काजू को "घी" में भून कर निकाल लिया,उसके बाद कुकर में रिफाइन डाला.....उसमें करी पत्ता पहले डाला,फिर खड़ा गर्म मसाला का एक पूरा छोटा पैकेट,एक चम्मच जीरा,दो तेजपत्ता फोड़न में डाला,फिर दो हरी मिर्च को बीच से काटकर डाला...फिर जब सब भून गया तो तीन बारिक कटा प्याज डाला,साथ में आधा फूलगोभी भी काटकर डाला और भुनना शुरू किया,जब सब भून गया फिर इसमें चावल डाला और दस मिनट भूना...फिर थोड़ा अदरक डाला,साथ में थोड़ा हल्दी,लाल मिर्च पाउडर,धनिया पाउडर,नमक,मैगी मसाला(सब्जी वाला) डालकर भूना...फिर जितना कटोरी चावल उतना कटोरी पानी डाला,फिर भुना काजू और धनिया का पत्ता डाला और कुकर का ढक्कन बंद कर गैस पर चढ़ा दिया।तीन सीटी के बाद कुकर को गैस पर से उतार लिया और बस बन गया...पुलाव......,बहुत टेस्टी बना था,आप भी जरूर ट्राई करें।

आज शाम जब मैं समोसा लेने चौक पर गई,तो सड़क बिलकुल सुनसान थी,दुकानें सब बंद थी....मानों अघोषित कर्फ्यू लग गया हो....आप भी देखे फोटो...सुनसान सड़क की...
शायद इसलिए " छठ " को महापर्व कहते हैं....जिसके बाद एक सन्नाटा छा जाता है,मानो सब रूक गया हो,थम गया हो....
आज की टैग लाइन रही  " जय छठी माता "
आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं....
------ अनुगुंजा






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