हम सब सुबह चार बजे उठ गए.....जल्दी जल्दी तैयार होकर पहुँचना जो था घाट पर,भोरवा अरघ का समय जो होने वाला था....हमने न्यूजपेपर में सूर्योदय का समय सुबह छह बजकर पाँच मिनट देखा था,यानि सुबह पाँच बजे तक सबको घर के कैम्पस में बने घाट पर पहुँचना था।हम सबके घर में इस समय एक हड़बड़ी मची रहती है,फिर चाहे,जिसको नदी के घाट पर जाना हो,उसे भी और जिसे घर में बने घाट तक जाना ।सब तरफ भागदौड़ रहती है....यही तो रौनक होती है छठ की।
सुबह वाला अरघ देने के बाद,आरती हुई....और फिर व्रती(मम्मी दीदी और मामी) ने घाट से बाहर आकर सबको प्रसाद बांटा,आशीर्वाद दिया और अपने भींगे कपड़े से हम सबका चेहरा पोछकर दुआएं दी.....प्रसाद में हमें ठेकुआ,केला,अकुड़ी,चावल,बद्धी,पीपा सिंदूर से चंदन....मिला।
उसके बाद इतने लम्बे व्रत के बाद, व्रती सबने पहले अकुड़ी को निगला,फिर शरबत,चाय पिया....उसके बाद पारण किया,पारण में चावल,हरा केराव की सब्जी,आलू,परवल,बैगन और प्याज का पकौड़ा(जिसे बचका या झूड़ी भी कहते हैं)...के अलावा पनीर आदि की सब्जी या कड़ी-बड़ी भी बनता है,इसको जब व्रती लोग खाते हैं तो इसे पारण कहते हैं।तो इस तरह सम्पन्न हुआ महापर्व छठ।
हम सब बहुत थक गए थे...इसलिए घर आने पर सबने एक-एक नींद ली....और आराम किया।आज हम,भाई,मम्मी और पापा...सब मम्मी दीदी(मौसी) के घर गए,उसका आशीर्वाद लेने......वहां,मुझे एक तितली दिखी,जिसका फोटो नीचे डाल रही हूँ...इस तितली के बारे में मेरे बड़े पापा(मौसा जी) ने बहुत रोचक जानकारी दी....पहले तितली का फोटो देखे....
बड़े पापा(मौसा जी) ने बताया कि इस तितली की उम्र केवल 18 दिन की होती है पर ये तितली जहां जाती है वहां मंगल,शुभ,सुख,शांति,प्रेम फैलाती है....कितनी बड़ी बात है जिसकी आयु ही 18 दिन की है, वो जाते जाते इस संसार को कितना कुछ देकर जाती है और एहसान भी नहीं जताती है,बदले में कुछ मांगती भी नहीं.....पुलाव की रेसिपी----
Subah jo kadi chawal ,, chakka bachka ,,paneer ki sabji bani wo sb khatam ho gaya jo fir khichri bana dali
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