शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

बैक टू वर्क

 महापर्व छठ हो गया और हम सबकी छुट्टी भी खत्म हो गई है....सब अपने काम पर लौट रहे हैं,जिसे अंग्रेजी में कहते है न    " बैक टू वर्क "....

जो प्रवासी बिहार आए थे छठ मनाने,वो भी अब वापस अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए जा रहे हैं,जिसके कारण रेलवे स्टेशन पर जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है....बस,ऑटो रिक्शा..सब फुल है यात्रियों से...." जो घर आए थे,अब वापस जा रहे हैं रोजगार के कारण "....बिहार में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है...इसी कारण लोग यहां से पलायन करते हैं दूसरे राज्य में...और बन जाते हैं प्रवासी।सरकार कोई भी दलील दें पर ये सच्चाई है कि बिहार में नौकरी का आकाल पड़ा है,इसका ज्वलंत उदाहरण  " बिहार शिक्षक बहाली " है...जो न जाने कितने सालों से अटकी पड़ी है।

अंधविश्वास की पट्टी खुली----

आज सुबह हमारी काम वाली बाई भी " बैक टू वर्क " यानि काम पर आ गई...वो भी पर्व करती है, तो वो हमारे लिए " छठ का प्रसाद " लेकर आई और हमें पूजा का चंदन भी लगाया.....उसने हमारे छोटू(बिल्ला) को भी पूजा का चंदन यह कहते हुए लगाया कि " इसको आप सबने पाला-पोसा है,ये घर का बालक है "....मुझे ये सब देखकर बहुत अच्छा लगा,लगा कि चलो अब लोगों की आँखों पर से अंधविश्वास,आडम्बर की पट्टी खुल रही है.....कोई भी " जीव " मनहूस या अपशगुनी हो ही नहीं सकता है ये सब हमारे मन का वहम होता है,अज्ञानता होती है।हमारा छोटू टीका लगाकर बहुत प्यारा लग रहा था...फोटो दिखाती हूँ....

देखा कितना प्यारा लग रहा है हमारा छोटू।हमें जितना हो सके इन बेजुबानों की सेवा करनी चाहिए,यही मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।याद रखे...शिक्षित वो है जो केवल सत्य को माने,कही हुई-सुनी सुनाई हुई बातों को सच न माने।

 

कच्चे आलू की सब्जी----


देखने में लग रही है सब्जी टेस्टी....यकिन माने सच में इसका स्वाद भी बहुत अच्छा रहा....हम सबने बहुत मजे के साथ खाया इस सब्जी को।इसकी रेसिपी मैंने अपने पहले के ब्लॉग में शेयर की है...आप देख ले।कच्चे आलू की सब्जी मुझे रोटी के साथ ज्यादा पसंद है और साथ में अचार मिल जाए तो क्या कहना।

आज जब मैंने रोटी में घी लगाने के लिए " घी का डब्बा " खोला,तो वो खाली था.....मैंने सोचा कि ' घी ' खत्म हो गया होगा पर मेरी मम्मी " जुगारू नम्बर वन " एक छोटी-सी शीशी लेकर आई...उसमें उसने बचाकर ' घी ' रखा था।शायद इसे ही  " माँ " कहते हैं..जो सब जानती है।

हमारे घर का बाहर से भी पेंट कल पूरा हो जाएगा....जब पेंट पूरा हो जाएगा,तो मैं आपको फोटो दिखाऊंगी।

आज मेरी मम्मी दीदी(मौसी),बड़े पापा(मौसा जी) और पूजा दीदी नासिक चले गए....मन बहुत दुखी हुआ,जब हमारा अपना कोई दूर जाता है तो एक अजीब-सा खालीपन छा जाता है।ये भावना और एहसास का रिश्ता होता है,जिसके कारण अपनेआप आँखों में आंसू आ जाते हैं।मेरी मम्मी दीदी और बड़े पापा दोनों बहुत बीमार रहते हैं,इस कारण उनकी ज्यादा चिंता होती है।भगवान से प्रार्थना है कि उनकी यात्रा मंगलमय हो।

आज की टैग लाइन रही " गाड़ी बुला रही है "
आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं....
------- अनुगुंजा





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