है तेरे नंगे पांव तो क्या,
तेरे हर पग रचेंगे नया इतिहास....
है तेरे साथ गरीबी का साया तो क्या,
विश्व दर्पण में दुनिया देखेगी तेरी पहचान....
है तेरे पंख टूटे हुए तो क्या,
तेरी उड़ान एक नया आसमान पाएगी.....
रचनात्मकता न जाने तेरे बस्ते की औकात,
कल्पना तेरी गढे, तेरे भविष्य की बुनियाद.....
खुला आसमां न पूछेगा, कहाँ से तू आया,
उड़ान तेरी कहेगी, क्या सफलता में तूने है पाया.....
है तुझे भी अधिकार बनाने का सुनहरा भविष्य,
बस हर स्कूल में सत्य-ईमानदार रहे " गुरु-शिष्य ".....
गुरु की गरिमा सदा रहे ऊँची हर विद्यालय में,
कर्तव्य पथ पर चले हमेशा बन शिक्षक रूप में.....
हर बच्चे की छुपी योग्यता पहचाने सिर्फ शिक्षक,
तभी तो कहते इन्हें अंधेरे से उजाले तक ले जाने वाला मार्गदर्शक.....
अज्ञान से निकालकर ज्ञान की राह पर लाते गुरु,
हर बच्चे को उड़ान के काबिल बनाते गुरु......
अनुगुंजा

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spam link in the comment box.