ठंड हो या गर्मी या हो बरसात....इसका प्रतिकूल प्रभाव हर जीव पर पड़ता है,फिर चाहे वो इंसान हो या जानवर।
लेकिन इंसान इतना स्वार्थी है कि उसे बस अपनी तकलीफ दिखती है,अन्य जीव उसे बेजान लगते हैं जैसे उसपर कोई असर ही नहीं पड़ता है।
सड़कों पर भटकने वाले कुत्ते, गाय और उनके बच्चे ठंड से कांपते रहते हैं,उनका पूरा शरीर थरथराता रहता है...आँखों से अपनी बेबसी के आंसू निकलते रहते हैं पर ये सब सड़क पर मौज-मस्ती करने वालों को कहां दिखती है,बल्कि इंसान कहे जाने वाले ये दानव, इस ठंड में उन बेजुबानों पर पानी फेंकते हैं,पत्थर मारते हैं,मानों वो जीव निर्जीव हो।ऐसे हैवानों में दया तो दूर की बात रही,इन्हें अपनी करतूत पर शर्म भी नहीं आती है।
ये तो बात हो गई बेजुबानों को तड़पाने वाले दानवों की। अब इसके बाद कुछ ऐसे महामानव भी हैं जो अपने कामों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें कोई फर्क ही पड़ता कि कौन जानवर ठंड या भूख से मर रहा है। ये महामानव अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी में उलझे रहते है,इनके लिए खुद की उपलब्धि, खुद ही सफलता ही मायने रखती है। इनका घर कैसे चलेगा,इनकी थाली में रोटी कैसे आएगी....बस यही इनका दायरा है।ये मानव कभी पलट कर भी नहीं देखते कि कहीं कोई कुत्ता इनकी तरफ उम्मीद भरी नजर से देख रहा है या नहीं।
लेकिन इस स्वार्थ भरे कलयुग में कुछ ऐसे इंसान भी होते हैं जो खुद सड़क पर भीख मांगते हैं या जूता पॉलिश करते हैं पर सड़क पर के इन बेजुबानों की परवाह करते हैं,उन्हें प्यार देते हैं और अपनी एक रोटी का एक टुकड़ा उनको खिलाते हैं। ये खुद सड़क किनारे सोते हैं पर अपनी फटी चादर का एक कोना इन बेजुबानों को देते हैं ।
मेरा सलाम ऐसे धनवानों को, जो अपनी गरीबी में भी इंसानियत निभाना जानते हैं ।
अनुगुंजा

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spam link in the comment box.