शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

दुर्घटना को निमंत्रण क्यों?

दो दिनों से मम्मी के पैर में बहुत तेज दर्द है,इसी कारण कल ब्लॉग पोस्ट न कर सकी....मम्मी की दवा लेने के लिए आज सुबह पापा के साथ डॉक्टर के यहां (आमगोला,पड़ाव पोखर) गई....तो रास्ते में मुझे बिजली के पोल के पास बिखरा हुआ तार दिखा...ऊपर उसी की फोटो डाली है....

मुझे इन तारो को देखकर यही लग रहा था कि लोग बार बार किसी छोटी या बड़ी दुर्घटना को क्यों न्योता देते हैं? मैं नहीं जानती कि ये तार बिजली के तार थे या टेलीफोन या केबल के......पर मेरा सवाल बस यही है कि रात के अंधेरे में अगर किसी बाइक सवार,साइकिल सवार या पैदल चल रहा कोई इंसान अगर उन तारों में फंस कर गिर जाए तो क्या होगा? और सोचिए अगर वो तार बिजली का हुआ तब क्या होगा? रोंगटे कांप जाते हैं जब हम किसी को बिजली के करंट से झुलसते हुए देखते हैं....फिर ऐसी लापरवाही स्थानीय प्रशासन या नगर निगम क्यों कर रहा है?....हर बार कोई घटना घट जाती है पर सरकार,प्रशासन और जनता सबक नहीं ले पाती है और चल पड़ती है एक दूसरी घटना की राह पर.......

याद रखे....अभी हमारा शहर बेला की फैक्ट्री के बॉयलर में हुए विस्फोट को भूला नहीं है....

सरकार संग जनता भी लापरवाह-----

कोरोना का नया वैरिएंट " ओमनीकॉन " बिहार में भी बहुत ही भयंकर रूप से प्रवेश कर चुका है पर बिहार के लोगों में लापरवाही हदें पार कर रही है, न तो लोग मास्क लगा रहे है और न ही भीड़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं...आज जब मैं और पापा मास्क लगाकर डॉक्टर के पास मम्मी की दवा लेने गए,तो हमने देखा कि अस्सी प्रतिशत लोग मास्क नहीं लगाए हुए थे.....ये जानबुझकर अपने साथ साथ सबकी जान को खतरे में डालना हुआ न.....जबकि कोरोना का अंजाम सबको पता है फिर भी सरकार और जनता दोनों लापरवाही की नींद में सोई है....कहीं ऐसा न हो जाए " अब पचतात होत क्या,जब चिड़िया चुग गई खेत ".....

ताड़ी बनाम नीरा------

बिहार सरकार नीरा के समर्थन में है....नीरा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है,ये हमारे लिए बहुत गुणकारी और लाभदायक है......लेकिन ये बिहार है...जहां शराब,गुटका,तम्बांकू पर बैन लगने के बाद भी ये धरल्ले से बिक रहे हैं...और लोग इसका सेवन भी कर रहे हैं....मुझे तो लगता है कि बिहार में " प्रतिबंध " सिर्फ नाम का होता है....यहां सबकुछ चालू रहता है....ऐसे में अगर सरकार " नीरा " का समर्थन करती है तो संभव है कि इस समर्थन को तोड़-मोडकी भी धरल्ले से बिक्री को बल मिलेगा....यहां कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जो हर जगह पड़ताल करें कि यहां                                   " ताड़ी बिकता है या नीरा ? " 

आज कुछ लोगों को चाय की दुकान में इसी विषय पर बात करते सुना.....सरकार से यही अपिल है कि " नीरा " पर भी प्रतिबंध लगे रहने दें....वरना बिहार में कुछ का कुछ होते देर नहीं लगती है....क्योंकि यहां                                        बिहार में " सबकुछ चलता है "

आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं...

आज की टैग लाइन रही " सावधानी "

------- अनुगुंजा


 

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