सोमवार, 27 दिसंबर 2021

दुर्घटना से मरती जनता

 

कल रविवार की सुबह हमारे शहर में एक भयानक दुर्घटना हुई.....नूडल्स के कारखाने का बॉयलर ही फट गया,धमाका इतना जबरदस्त थी कि आसपास के घरों की खिड़की के शीशे टूट गए, कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई..धमाके की आवाज और कंपन दस किलोमीटर तक महसूस हुआ....इस हादसे में न्यूजपेपर के हिसाब से अबतक सात मजदूर मारे गए हैं और कई घायल हो गए हैं। बिहार सरकार भी मरने वालों को मुहावजा दे रही है और जाँच कराने की बात भी सुनने में आई है।

क्यों हुआ ये हादसा ?

ऊपर तो मैंने बस आपको इस दुर्घटने की जानकारी दी...अब आते हैं असल मुद्दे पर.....आखिर ये दुर्घटना क्यों हुई?... जबकि उस फैक्ट्री के मालिकों, मैनेजर आदि को बॉयलर की दुर्दशा या खराबी के बारे में पता था, तो उन्होंने उसकी मरम्मत सही तरिके से और तुरंत क्यों नहीं करवाई...आखिर किस बात का उन्हें इंतजार था, क्या वो इस इंतजार में थे कि ये दुर्घटना हो या उनकी तरफ से जानबुझकर की गई लापरवाही थी? न्यूजपेपर के अनुसार सभी अपने घरों में ताला मारकर गायब हैं....आखिर कौन जवाब देगा,इन गरीब बेगुनाहों की मौत पर? 

मृतकों की संख्या पर भी सवाल है...आखिर इतने बड़े हादसे में क्या केवल सात लोगों की ही मौत होती है या कुछ छुपाया जा रहा है...

न्यूजपेपर को पढ़कर हमारी रूह तक सिहर गई....जिस हालात में उन मजदूरों के शव मिले...उससे आत्मा तक कांप गई है।

याद है न.... " भोपाल गैस त्रासदी "......                                    " उपहार सिनेमा अग्निकांड " ........क्या और क्यों हुआ था? इसका जवाब सब जानते हैं पर मरा कौन? केवल आम जनता....जो शिकार हुई ऐसी लापरवाही का....ये सिलसिला अबतक जारी है पूरे देश में,बस जगह बदलते हैं....मरता तो गरीब ही है....पैसे वाले,रसूख तो बचते ही जाते हैं....इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते एक मध्यमवर्ग और गरीब की पूरी जिन्दगी बीत जाती है,मगर वो उन पीड़ितों की जिन्दगी उसी दुर्घटना पर रूक जाती है।

आखिर कब तक?.....

कैसे किसी कंपनी के मालिक की इतनी हिम्मत होती है कि वो जानबुझकर लापरवाही करता है और बेखौफ होकर सिर्फ पैसा कमाता है और फैक्ट्री की मरम्मत से जी चुराता है यानी पैसा बचाता है.....क्या कोई नियम या कानून नहीं है हमारे देश में? केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर सोचे और कड़े कदम उठाए....ताकि कोई गरीब इतनी दर्दनाक मौत न मरे, केवल मुहावजा और जाँच करवाना न्याय नहीं है....

आज के लिए बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं...

आज की टैग लाइन रही " जागे सरकार "

----- अनुगुंजा




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any spam link in the comment box.

जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...