हमारे चौक पर छोटी-सी पान की दुकान है,उसी के बगल में ब्रेड पकौड़ा,प्याज के पकौड़े,चाय की छोटी-सी दुकान है...जिसे एक लड़की अपने पिता के साथ चलाती है...वो लड़की नजदीक के कॉलेज में "बी.कॉम पार्ट टू" में पढ़ती भी है,शादी त्योहार पर प्रोफेशनली मेंहदी भी लगाती है....अक्सर चौक पर आने-जाने के दौरान मैं उसे देखती थी,एक दिन मैंने उससे बात की तो बहुत खुशी हुई उसकी लगन,मेहनत को देखकर....उस लड़की को सड़क पर भटकने वाली गाय,बछड़े,कुत्ते आदि जानवरों को खाना-पानी भी देते हुए मैंने कई बार देखा है....उसकी इंसानियत देखकर बहुत अच्छा लगा.....
मुझे लगता है कि हमारे देश में न जाने कितनी गरीब परिवार से आने वाली ऐसी बेटियां होंगी,जो मुश्किल परिस्थिति में अपने घर को संभालते हुए,पढ़ाई करते हुए...एक उज्जवल भविष्य का सपना देखती होंगी। सरकार योजनाएं तो बहुत बनाती है पर वो जमीनी स्तर पर सही तरह से पहुँच नहीं पाती हैं और बेटियां वंचित रह जाती हैं.....
" हैं हमारे पंखों में भी उड़ान,
बेटियां मांगे अपने हिस्से का आसमां....
सपने को साकार करने को संघर्ष करती,
अपनी भाग्यरेखा से रोज जंग लड़ती.....
आधी आबादी मांगे अपना हक और अधिकार,
बेटियों के दिल की पुकार सुने हमारी सरकार...."
--------- अनुगुंजा
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