गुरुवार, 23 दिसंबर 2021

सादा भोजन

 

जब भी हमारी थाली में सादा भोजन आता है,तो सबसे पहले हमारा रिएक्शन यही होता " क्या बकवास खाना है?..कौन खाएगा इसे?...निगला भी नहीं जाएगा "......इन बातों को बोलने से पहले थोड़ा रूके और सिर्फ एक बात सोचे 
" क्या आज रात इस पूरी दुनिया में सबने खाना खाया होगा? सबका पेट भरा होगा? " .....इसका जवाब होगा 
" नहीं "....

इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग होंगे,जो कूड़े-कचरे के डब्बे में खाना ढूंढते होंगे...सड़क पर के आवारा कुत्तों के मुँह से रोटी छिनना चाहते होंगे...,क्योंकि सवाल वास्तव में "इस पापी पेट" का होगा,जो कई दिनों से खाली होगा....इसे कहीं से,कुछ भी चलेगा खाने के लिए.....और जब क्रूर भाग्य कचरे से भी खाना छिन लेता है तो यहां होती है " भूखमरी ".....

" भूखमरी " का जिक्र होते ही सरकार अपने दावे पेश करने लगती है कि हमारे राज्य में भूखमरी से कोई नहीं मरा है...हमारे यहां गरीबों के लिए बहुत सी योजनाएं हैं....लेकिन असलियत का चेहरा बहुत भयानक है,जिसका गवाह बनती है लोगों की चमड़े से चिपकी उनकी हड्डियों वाली पसली....धंसे हुए पेट...सब बयां कर देते हैं। उनकी थाली और बुझे हुए चूल्हों में सिर्फ मिट्टी और धूल ही नजर आती है।

तो आज का मेरा ब्लॉग उन लोगों के लिए है जो सादा भोजन के मिलने को अपना दुर्भाग्य समझते हैं....अन्न के महत्व को समझे,इसी से जीवन चलता है...बिना अन्न के जिन्दा नहीं रह सकता कोई जीव....हम बहुत भाग्यशाली है,क्योंकि आज रात हमने भरपेट भोजन किया है,वरना न जाने कितने लोग पानी पीकर सो रहे होंगे....

आज मेरी भाभी वर्षा और मम्मी ने राजमे की सब्जी बनाई...बहुत टेस्टी बनी थी....

आज की चाय पर चर्चा बढ़ती ठंड में सावधानी बरतने को लेकर हुई....साथ ही जो गर्म कपड़े हम इस्तेमाल नहीं करते हैं उन्हें जरूरतमंदों में बांट देना चाहिए....साथ ही ठंड से बचने के लिए रात को कोई आवारा कुत्ता या गाय हमारे द्वार पर आ जाए,तो उसके साथ भी हमें इंसानियत दिखानी चाहिए और जितना हो सके उनकी मदद करनी चाहिए।

आज बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं...

आज की टैग लाइन रही " अन्न का महत्व "

------- अनुगुंजा

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