बुधवार, 22 दिसंबर 2021

मम्मी पापा के लिए शॉपिंग

 




मुझे सबसे ज्यादा खुशी अपने मम्मी-पापा के लिए कुछ भी खरीदने में मिलती है,जब हम अपने "जन्मदाता" के लिए प्यार के साथ कुछ करते हैं तो हमें एक अजीब-सी खुशी,सुकून और शांति मिलती है। ठंड बढ़ रही है तो मैंने सोचा कि क्यों न मम्मी-पापा के लिए कुछ गर्म कपड़े लिए जाए.....तो यही सोचकर आज सुबह मैं और पापा मॉल गए,वहां मैंने मम्मी के लिए स्वेटर लिया और पापा के लिए गर्म जैकेट लिया,पापा के लिए लेना मुझे फुल स्वेटर था पर मार्ट में मिला ही नहीं....

मम्मी और पापा दोनों बहुत खुश हुए....और उनकी खुशी से मुझे आनंद मिला।

आज मैं जब बाजार गई,तो रास्ते में मुझे फूल बेचने वाली छोटी-सी नर्सरी मिली...मैंने वहां से बड़े गेंदा के फूल का पौधा लिया,मेरी मम्मी को पेड़-पौधों का बहुत शौक है...हमारे छत पर छोटा-सा गार्डन जैसा भी मम्मी ने लगाया है पर आजकल सब पौधे ठंड से सूख रहे हैं,मुरझा रहे हैं..फूल नहीं दे रहे हैं,ये देखकर मम्मी बहुत दुखी हो जाती है....इसलिए गेंदा का पौधा मैंने खरीदा और गमले में लगा दिया।

हमें वो काम हमेशा करते रहना चाहिए,जिससे हमारे मम्मी-पापा खुशी मिलती हो...यही सार्थक जीवन का मतलब है।

प्लास्टिक-असली फूलों का फोटो----

प्लास्टिक के फूल और असली फूल दोनों को जब हम एकसाथ देखते हैं तो मुझे ये एहसास होता है कि ये हमें जीवन का अर्थ सीखा रहें हैं...

प्लास्टिक में प्राण नहीं होता है,ठीक उसी प्रकार जब हम झूठ,नकलीपन,दिखावा का मुखौटा डालकर अपना काम साधते हैं...उस वक्त हमारे जमीर में भी प्राण नहीं होता है।

प्लास्टिक के फूल कभी सूखते नहीं....जैसे बनावटीपन कुछ दिनों तक ही चलता है असली प्लास्टिक रूप जल्द सामने आ जाता है और वही परमानेंट रहता है।

लेकिन जो असली फूल होते हैं वो भगवान के चरणों में चढ़ते हैं,क्योंकि उनमें सच्चाई,सत्य,प्रकृति,प्राण सब समाया रहता है। हमें यही कोशिश करनी चाहिए कि हम असली के फूल बने और इस विश्व में सच की खुशबू फैलाए।

आज सुबह चाय पर चर्चा में हमने कामकाजी महिलाओं के बारे में बात की,हमारे मोहल्ले की अधिकत्तर महिलाएँ इस ठंड में सुबह-सुबह अपने-अपने काम पर निकल जाती हैं।कोई स्कूल में पढ़ाती हैं,तो कोई बैंक में काम करती हैं....मगर वो सब अपने घर-परिवार का सारा काम करके अपने काम पर निकलती है....ये सब देखकर यही लगता है कि कौन कहता है कि औरतें कमजोर होती है....सही में नारी ही इस सृष्टि का आधार है।

कल का मटर-पनीर बहुत टेस्टी था,कल रात हमलोगों ने खाया था। वर्षा भाभी ने बनाया था...वो भी बैंक से आने के बाद घर का भी सारा काम बखूबी संभालती हैं....वैसे उनके काम में मैं और मम्मी भी मदद करने की पूरी कोशिश करते हैं...इसी को तो परिवार कहते हैं,जहां मिलकर सब काम होता है।

इसलिए हर नारी करती है मल्टीटास्किंग.......

आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं...

आज की टैग लाइन रही " लव यू मम्मी-पापा "

------ अनुगुंजा 

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