कल पूरे दिन और रात तक मैं किताब की प्रूफरीडिंग का काम ही करती रही,work from home वाले job में बहुत मेहनत लगती है।खैर...बिना मेहनत के तो कुछ नहीं होता है,मोबाइल से प्रूफरीडिंग करने पर आँखों पर बहुत जोर पड़ता है,सिर में दर्द भी होने लगता है।इसी सब कारण से कल ब्लॉग नहीं लिख पाई।
आज मैंने सोचा कि क्यों न " सुबह सुबह " ही ब्लॉग लिखा जाए। आज सुबह सब्जीवाला सब्जी का ठेला लेकर आया था,बस अभी से कुछ देर पहले....मैं तो सब्जी के भाव देखकर दंग रह गई....मटर साठ रूपये किलो बिक रहा था और छोटा सा कद्दू चालिस रूपये मिल रहा था।ऊपर आप जो फोटो सब्जी की देख रहे हैं उसका कुल दाम सौ रूपया है....सोचिए इतनी महंगाई में मध्यमवर्ग और गरीब क्या खाएगा? सिर्फ चावल और दाल फांक(खाकर) कर तो नहीं रह सकते हैं न...,जब सब्जी का दाम इतना ज्यादा होगा,तो लोगों की थाली बिना सब्जी के ही रहेगी या चटनी के जितना सब्जी थाली में नजर आएगी।
आज सुबह की चाय में चर्चा किसी भी बीमारी को लेकर लापरवाही को लेकर हुई....अगर समय पर डॉक्टर के पास पहुँच जाए,तो शरीर को बीमारी से कम नुकसान होता है।वरना जरा सी लापरवाही भारी पड़ जाती है,जिसका परिणाम पूरी जिन्दगी भोगना पड़ता है।इसलिए कहा गया है कि " सावधानी ही बचाव है ".,लेकिन बिहार में हेल्थ डिपार्टमेंट का हाल बहुत ही खराब है,या तो प्राइवेट अस्पताल में महंगा इलाज कराए या सरकारी अस्पताल का चक्कर लगाए,बड़े सरकारी अस्पतालों में सोर्स या पहुँच होने पर ही नम्बर लगता है,वरना सिर्फ इंतजार ही करना पड़ता है,ऐसे में हार कर मध्यमवर्ग या गरीब को प्राइवेट में इलाज कराना पड़ता है,भले इलाज कराते कराते घर ही क्यों न बिक जाए।....तो बस इसी विषय को लेकर राजू मामा,मामी,पापा,मम्मी और मेरी बात हुई।
आज मम्मी पालक और सरसो का साग बना रही है,इसके साथ साथ बिना लहसून-प्याज का कद्दू भी बनाएगी।
खतरों वाला गटर...काश: प्रशासन ध्यान देता---
ऊपर का फोटो देखे और सोचे कि कैसा स्वच्छ है हमारा शहर। इन खुले नालों और गटर से सिर्फ बदबू,गंदगी और बीमारी ही फैलती है।ये खुले नाले और गटर किसी भी भयंकर दुर्घटना को भी निमंत्रण देते हैं।हो सकता है कि रात को इनमें कोई जानवर या इंसान गिर जाए...फिर तो उसकी मौत भी हो सकती है।आपको जानकर ताज्जुब होगा कि सबसे ऊपर वाला फोटो शिव मंदिर के गेट के एकदम करीब का है, ये सब दृश्य हमारी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाता है। लेकिन इन सबसे प्रशासन अनजान है।बहुत ही दुख और शर्म की बात है।
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