शुक्रवार, 5 नवंबर 2021

जीवन एक तमाशा !!!!

 "जीवन एक है तमाशा,लाख मुट्ठी बांध लो..कुछ न हाथ आता"

जब भी हम समझते हैं कि जीवन हमारी बंद मुट्ठी में कैद है,हम इसे जैसा चाहे,वैसा चला सकता है....तभी ऊपर वाला डायरेक्ट डोर खींच कर अपनी अहमियत जता देता है। मेरा भाई दिवाली के लिए लाइटें लेने, मेरे चौक पर के बिजली के दुकान पर गया(जहां से वो हमेशा लाइटें लेता है)..तो वहां किसी महिला को बैठा पाया,जब भाई ने दुकानदार वाले भईया के बारे में पूछा,तो उस महिला ने जवाब दिया कि " उनकी मौत कुछ महीने पहले कोरोना से हो गई है,मैं उनकी पत्नी हूँ "....ये सुनकर भाई अवाक रह गया....

कोई कुछ भी ऊपर लेकर नहीं जाता है, पर फिर भी इंसान कड़वे बोल, बेईमानी का इस्तेमाल करता रहता है....कल एक महिला दुकानदार से मेरी बहस हो गई,मैं उसके दुकान में " बंधन बार " लेने गई थी, पर वो बहुत बदतमीजी से बात की,तो मुझे भी गुस्सा आ गया। अरे !!!! आप दुकानदार है आपका काम है, हर सामान का दाम बताना, और मोलभाव तो होते ही रहते हैं। इसमें इतना गुस्सा होने की क्या बात है? कुछ दुकानदार अपने ग्राहकों से बहुत अच्छा बर्ताव करते हैं और कुछ खुन्नस निकालते हैं.....

आज दोपहर दो बजे से लेकर शाम चार बजे तक,मेरी और पापा की मार्केटिंग हरीसभा,अघोरिया बाजार,कल्याणी,मोतीझील तक होती रही...मम्मी का बार बार फोन आ रहा था,क्योंकि हमने दोपहर का खाना ही नहीं खाया था।असल में जाम को क्रॉस करते-करते हम ये भूल ही गए थे कि हमने खाना नहीं खाया है।मम्मी का गुस्सा तो सातवें आसमान पर था...खाना जो ठंडा हो रहा था। " ट्राफिक जाम " तो हद पार था....पूरा कल्याणी-मोतीझील ब्लॉक हो गया था,हम और पापा पैदल यात्रा करने को मजबूर थे,क्योंकि इस जाम में आप ई-रिक्शा या ऑटो पर नहीं चल सकते हैं।हालांकि ट्राफिक पुलिस थी पर वो लाचार और बेबस दिख रही थी...जैसे उसके बस की बात थी ही नहीं।इस जाम में स्कूटी से बाइक की टक्कर जैसी दुर्घटना भी खूब हो रही थी....लोगों का गुस्सा फट पड़ा था।

जाम का जंग कब मिटेगा शहर से----

मामी की बनाई स्वादिष्ट कढ़ी ------
यकिन मानेंं...कढ़ी इतनी टेस्टी थी कि मैं क्या कहूं.....कल मैं मामी से पूछकर आपसे इसकी रेसिपी शेयर करूंगी।

भूख के कारण बनाई दस मिनट वाली सब्जी-----

कहते हैं....
 " आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है " ....जिसने भी कहा है,बिलकुल सच कहा है। असल में आज सुबह मुझे जोर की भूख लगी थी....और हमारे फ्रिज में कल की कोई सब्जी नहीं बची थी....मामी ने कढ़ी भी दोपहर में बनाया था....,मम्मी ने कहा कि पराठा बना देती हूँ,अचार के साथ खा लो....पर मैंने मना कर दिया,क्योंकि मुझे सब्जी खानी थी।
बस....मैंने बोला मम्मी से,कि तुम आटा गूथकर पराठा गैस पर एक तरफ बनाओ और दूसरी तरफ गैस पर मैं दस मिनट में      " कच्चे आलू की सब्जी " बनाऊंगी।
रेसिपी----
नया आलू का छिलका बहुत पतला होता है और ये आलू जल्दी पक भी जाता है....,तो पहले मैंने कढ़ाई में तेल डाला,फिर तेल में हींग,करी पत्ता,कसूरी मेथी,जीरा का फोड़न डाला,......फिर कटा हुआ आलू-प्याज-टमाटर साथ में डाला....एक मिनट भुनने के बाद इसमें अदरक-लहसून का पेस्ट डाला साथ में हल्दी,लाल मिर्च पाउडर,धनिया पाउडर,छोला मसाला,तीखा लाल,नमक डालकर खूब भूना.....वो भी तेज आंच पर,फिर जब कढ़ाई पकड़ने लगा मसाला तो पानी डाला और प्लेट से ढक दिया...ताकि आलू पक जाए।फिर जब पानी सूखने ,तो धनिया पत्ता डालकर गैस से उतार ले।इसे बनाने में मुझे " दस मिनट " लगे.....और टेस्टी बनी सब्जी।


इसे कहते हैं " कुलिया "....जो दिवाली की रात बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि-कामयाबी-लम्बी आयु के लिए मुड़ी,फरही,बताशा,मिठाई से भरती है....

आज छोटी दिवाली है...कहते हैं इसमें पुराना दीया जलाया जाता है....आपको छोटी दिवाली की शुभकामना।
आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं.....

आज की टैग लाइन-- " जीवन का आनंद लें "
--------अनुगुंजा

नोट---- देर से ब्लॉग डालने के लिए माफी मांगती हूँ....असल में मुझे सर्दी-खांसी-बुखार सब हो गया है।







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