दस पैसे....अभी भी चलते हैं और इसमें एक कप चाय !!!!!! चमत्कार हो गया....भई....,यही बात सबसे पहले आपके दिमाग में आई होगी.....
तो भई !!!!!! जागो....ये साल 2021 है जहां धनिया का पत्ता भी पचास रूपये में मात्र सौ ग्राम मिलता है....तो बेचारे इस भूले-बिसरे गीत की तरह वाले एलुमिनियम के दस पैसे को कौन पूछता है? ये तो अब मयूजियम में रखने के काम आता होगा....जरा इसकी शक्ल तो देख लें...आप भी,नीचे फोटो डाली है...
किस्सा दस पैसे का----
पापा ने बताया कि साल 1975 में इस दस पैसे में एक कप चाय आती थी....मैं तो चौंक पड़ी,आज तो तीस-चालिस रूपये भी एक कप चाय के लिए कम पड़ जाते हैं।
महंगाई कहां से कहां तक चली गई....गरीब,गरीब ही रहा और पैसे ने अपनी शक्ल बदल ली....,आज सब्जीवाला साठ रूपये में पाव भर मटर बेच रहा था...बताइए...ये तो हाल है...तो मुझे दस पैसे वाली बात अच्छी लगी,इसलिए आपसे शेयर किया।
कल दिवाली है....तो जाहिर सी बात है हर घर में तैयारी हो रही होगी,आज दीया बेचने वाला आया...जिसने सौ रूपये में पचास दीया बोला...,कभी-कभी लगता है कि लोग अपने काम के प्रति ईमानदार नहीं होते हैं,तो वो दीया बेचने वाला ठेला पर दीया लेकर आया था और उसने हड़बड़ी में जल्दी-जल्दी करते हुई झोेले में मुझे पचास दीया डाल दिया।मुझे गड़बड़ लगा,तो मैंने दुबारा उसके सामने सब दीया को चेक करना शुरू किया,तो ज्यादातर दीया में क्रैक(दरार) थी....इससे तो सारा तेल ही रिस जाता।फिर जब मैंने डांटकर दिखाया,तो उसने सुधार किया।इस सबके बीच उसके ठेले पर एक प्यारी सी बच्ची बैठी थी,जो पाँच साल की होगी,उसने मुझे अपना नाम " दीपांशी " बताया....बहुत ही क्यूट थी,वो मुझे अपने अपने नन्हें नन्हें हाथों से दीया उठाकर दे रही थी।वो मुझसे बहुत प्यार और मासूमियत के साथ बात कर रही थी।फिर बच्ची ने अपनी मर्जी से एक एक्सट्रा दीया मेरी तरफ बढ़ाया....जिसे देख उसके बाप ने तुरंत उसे रोक दिया और दीया उसके हाथों से छिन लिया।पर फिर भी वो बच्ची मेरी तरफ देखकर मुस्कुराती ही रही....मैं उस नन्ही परी की मुस्कुराहट कभी नहीं भूल सकती।मैंने बाद में उस बच्ची को दस रूपया दिया( क्योंकि मेरे हाथ में उस समय उतना ही था) और बोला ये सिर्फ दीपांशी का है,इससे टॉफी खाना...वो बच्ची खुशी से झूम गई उस दस रूपये को देखकर....
ऐसा लगता है कि आज का दिन मेरा " दस " के नाम रहा....
आज घर में काम बहुत ज्यादा था...इसलिए दोपहर के खाने में दाल-चावल-आलू का चोखा(भरता)-परवल का भुजिया ही बना....बहुत काम करने के बाद यदि गरमा गरम खाना मिलता है तो मजा आ जाता है।
मेरा भाई कुछ लाईट लेकर मार्केट से आया है....नए पेंट हुए घर को सजाने के लिए....तो आप भी थोड़ा झलक देख ले...वैसे सारी लाइटिंग कल दिखाऊंगी....
कैसा लगा ???? जरूर बताएं.....
आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं....
आज का टैग लाइन रहा---- दीपांशी की तरह प्यार की रौशनी फैलाओ
------- अनुगुंजा
Ahbhoot
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