मंगलवार, 2 नवंबर 2021

क्या कहता है धनतेरस

 जय गणपति देवा...जय माता लक्ष्मी

आज धनतेरस है....और परसो दिवाली,आप सभी को धनतेरस और दिवाली की बहुत बहुत शुभकामना।आप सबपर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहें...घर में सुख-शांति आए...यही कामना है। आज धनतेरस के दिन सोना,चांदी,पीतल,तांबा...आदि धातु का सामान खरीदा जाता है...तो मेरे भाई ने सोंचा कि क्यों न पीतल के " श्री गणेश जी-माता लक्ष्मी " जी की मूर्ति का ही घर में स्वागत किया जाए,वैसे मेरे विचार से भगवान सिर्फ भक्त के भाव के भूखे होते हैं।किसी भी कार्य की शुरूआत " गणपति देवा " से ही होती है...साथ में माता लक्ष्मी अपनी ममता की छांव देती है...तब ही हर काम शुभ होता है। पापा भी तांबा का गिलास लेकर आए...,अच्छा लगता है कि जब किसी विशेष दिन ऐसी खरीदारी करते हैं।यही तो संस्कृति है हमारे देश की।

आज के दिन लोग झाड़ू भी खरीदते हैं...इसलिए मार्केट में तो हर जगह झाड़ू ही झाड़ू नजर आते हैं।लोग अपने बाइक,स्कूटी,साइकिल पर झाड़ू लेकर जाते दिख जाते हैं।फूल झाड़ू और नारियल वाला झाड़ू भी लेते हैं...वैसे मेरा भाई फूल झाड़ू लेकर आया है।

मम्मी बोलती है कि आज रात " यम का दीया " भी घर से बाहर निकलता है...ये दीया पुराना होता है और घर के गेट से बाहर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।इस दीया में लोग सात तरह का अनाज भी डालते हैं।

ये सब रीति-रिवाज मुझे बहुत अच्छे लगते हैं...मेरे विचार से इंसान कितना भी मॉडन क्यों न हो जाए..उसे अपनी रीति-रिवाजों की जड़े नहीं भूलनी चाहिए।हमारी हिन्दुस्तानी संस्कृति,सभ्यता,रिवाज,नियम...सबके मायने होते हैं,ये ऐसे ही बेमतलब के नहीं होते हैं,इसका पालन हम सबको करना चाहिए और आगे आने वाली पीढ़ी को सीखाना चाहिए।मुझे ये जानकर बहुत खुशी हुई कि मेरा भाई " यशु " अपने बेटे                 " सोहम " को ये सारे संस्कार बखूबी दे रहा है,इसमें मेरी भाभी " सोनम " भी पूरा साथ दे रही है। वैसे ये बता दूं कि मेरी भाभी ' सोनम ' सबसे पहले मेरा ब्लॉग पढ़ती है और कमेंट भी सबसे पहले देती है....लव यू सोनम...

माता-पिता ही बच्चे में संस्कार देते हैं।इन संस्कारों में बहुत शक्ति होती है।मुझे गर्व है अपनी संस्कृति पर।

सूखी सब्जी चटपटी----
जिस किसी ने " आलू " को सब्जी का राजा बनाया होगा, वो बहुत बुद्धिमान होगा....हमारे घर की फ्रिज में कोई और सब्जी हो या न हो...पर आलू रहता ही रहता है। फिर इस आलू से हम कोई भी एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं....वो भी बिंदास होकर।तो आज हमारी सब्जी वाली बहुत देर से आई...इसलिए हमने आलू की सूखी चटपटी सब्जी बनाने का निर्णय किया।
रेसिपी-----
आलू को उबालकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें।फिर कढ़ाई में तेल डालें( मेरी खराबी है कि मुझसे ज्यादा तेल डल जाता है और फिर मम्मी गुस्सा होती है).....तेल जब गर्म हो जाए तो उसमें हींग,करी पत्ता,हरी मिर्च(मैंने तो चार डाला),जीरा...डाले फोड़न में।उसके बाद बारिक कटा प्याज डाले और प्याज लाल होने तक भूने।दो-तीन मिनट भुनने के बाद एक चम्मच लहसून डाले और भूने(चार मिनट),फिर इसमें हल्दी,धनिया पाउडर,लाल मिर्च पाउडर,कश्मीरी तीखा लाल,छोला मसाला( दो चम्मच) डाले और भूने...पाँच मिनट बाद इसमें कटा आलू डाले और फिर नमक डाले और तब तक भूने,जबतक मसाला कढ़ाई पकड़ने न लगे......यानि लाल होने तक,फिर उसमें कसूरी मेथी डाले और फिर धनिया का पत्ता डालकर...गैस पर से उतार लें।
यकीन माने ये सूखी सब्जी बहुत चटपटी लगती है और रोटी-पराठे के साथ तो क्या कहना.....मुँह में पानी न आ जाए,तो कहना।

आज मुझे अपने घर की सफाई में ये खिलौने वाला घर मिला....ऊपर फोटो डाली है,है...न...बहुत सुंदर। मेरे विचार से घर या परिवार वो होता है जो हर सुख-दुख में साथ होता है....जो साथ नहीं, वो परिवार नहीं।परिवार बंद मुट्ठी की तरह हमेशा एकसाथ रहने में यकीन रखता है....इंसान परिवार के बिना कुछ नहीं होता है।ये सब बातें मैंने अपनी मामी से सीखी है....जो हमेशा हर सुख-दुख में हम सबकी ढाल बनकर साथ रहती हैं।वो हमारे घर का आधार हैं।मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

तो आज टैग लाइन यही रहा कि - परिवार ही सबकुछ है

आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं.....

---------- अनुगुंजा








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