जय गणपति देवा...जय माता लक्ष्मी
आज धनतेरस है....और परसो दिवाली,आप सभी को धनतेरस और दिवाली की बहुत बहुत शुभकामना।आप सबपर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहें...घर में सुख-शांति आए...यही कामना है। आज धनतेरस के दिन सोना,चांदी,पीतल,तांबा...आदि धातु का सामान खरीदा जाता है...तो मेरे भाई ने सोंचा कि क्यों न पीतल के " श्री गणेश जी-माता लक्ष्मी " जी की मूर्ति का ही घर में स्वागत किया जाए,वैसे मेरे विचार से भगवान सिर्फ भक्त के भाव के भूखे होते हैं।किसी भी कार्य की शुरूआत " गणपति देवा " से ही होती है...साथ में माता लक्ष्मी अपनी ममता की छांव देती है...तब ही हर काम शुभ होता है। पापा भी तांबा का गिलास लेकर आए...,अच्छा लगता है कि जब किसी विशेष दिन ऐसी खरीदारी करते हैं।यही तो संस्कृति है हमारे देश की।आज के दिन लोग झाड़ू भी खरीदते हैं...इसलिए मार्केट में तो हर जगह झाड़ू ही झाड़ू नजर आते हैं।लोग अपने बाइक,स्कूटी,साइकिल पर झाड़ू लेकर जाते दिख जाते हैं।फूल झाड़ू और नारियल वाला झाड़ू भी लेते हैं...वैसे मेरा भाई फूल झाड़ू लेकर आया है।
मम्मी बोलती है कि आज रात " यम का दीया " भी घर से बाहर निकलता है...ये दीया पुराना होता है और घर के गेट से बाहर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।इस दीया में लोग सात तरह का अनाज भी डालते हैं।
ये सब रीति-रिवाज मुझे बहुत अच्छे लगते हैं...मेरे विचार से इंसान कितना भी मॉडन क्यों न हो जाए..उसे अपनी रीति-रिवाजों की जड़े नहीं भूलनी चाहिए।हमारी हिन्दुस्तानी संस्कृति,सभ्यता,रिवाज,नियम...सबके मायने होते हैं,ये ऐसे ही बेमतलब के नहीं होते हैं,इसका पालन हम सबको करना चाहिए और आगे आने वाली पीढ़ी को सीखाना चाहिए।मुझे ये जानकर बहुत खुशी हुई कि मेरा भाई " यशु " अपने बेटे " सोहम " को ये सारे संस्कार बखूबी दे रहा है,इसमें मेरी भाभी " सोनम " भी पूरा साथ दे रही है। वैसे ये बता दूं कि मेरी भाभी ' सोनम ' सबसे पहले मेरा ब्लॉग पढ़ती है और कमेंट भी सबसे पहले देती है....लव यू सोनम...
माता-पिता ही बच्चे में संस्कार देते हैं।इन संस्कारों में बहुत शक्ति होती है।मुझे गर्व है अपनी संस्कृति पर।
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