दहेज ने नाम बदला है,लोभी-लालची लोग वही है--
आप सोंच रहे होंगे कि टाइटल में बातें दहेज की और फोटो कबाड़ी द्वारा तराजू से तौलते कबाड़ की.....तो....भई !!!!! मेरे विचार में दहेज भी " खरीद-बिक्री " वाला धंधा ही है...जिसमें एक तरफ लड़का(होने वाला दुल्हा) होता है और दूसरी तरफ उसे मिलने वाली रकम,सामान,कैश...,बेचारे लड़की वाले सारी मनमानी सहते रहते हैं और चुप रहते हैं।
अब चुकी सब जानते हैं कि दहेज लेना कानून के लिहाज से जुर्म है,अपराध है...तो इस दहेज का नाम बदलकर " गिफ्ट " कर दिया गया।हमारे आस-पास ही बहुत ऐसे लोग भी हैं जो दिल खोलकर दहेज मांगते हैं और समाज के सामने शरीफ बनकर बोलते हैं कि ये तो लड़की वालों ने अपनी मर्जी से दिया है। न्यूजपेपर भरे हैं ऐसी खबरों से...इसमें दहेज हत्या भी शामिल होती है।दुख होता है ऐसा दोगलापन देखकर....
लेकिन मुझे इस बात पर गर्व है कि दहेज न तो मेरे " नाना-नानी " ने लिया मामा की शादी के समय और न ही मेरे मम्मी-पापा लेंगे मेरे भाई की शादी के समय...बल्कि मेरा भाई खुद ही दहेज का सख्त विरोधी है वो बोलता है कि मैं कोई सामान नहीं हूँ जो बेचा जाऊं।आई एम प्राउड ऑफ यू...मेरे भाई.....
इंसानियत जिन्दा है हमारे समाज में...ये आज साबित हुआ।मेरी दोस्त देबोश्री मैम ने आज फोन कर बताया कि उनकी कॉलोनी में एक बंद घर में एक कुत्ता ग्रिल में फंस गया है और बहुत चिल्ला रहा है।मेरी तरह देबोश्री मैम को भी जानवरों,पक्षी से बहुत लगाव है वो सड़क पर के आवारा कुत्तों,गाय,बछड़ा,बिल्ली को भी खाना देती है...सच में उनका दिल बहुत बड़ा है।कौन कहता है कि एक मीडिल क्लास परिवार में लोग बड़े दिल वाले नहीं हो सकते हैं।फिर थोड़ी देर बाद देबोश्री मैम ने दुबारा फोन कर मुझे बताया कि उनका छोटा-सा बेटा प्रतिक ने उस कुत्ते को बचा लिया है...उसने अपने हाथ से फंसे ग्रिल से कुत्ते को बाहर निकाल दिया है।ये सुनकर मन बहुत खुश हो गया....देबोश्री मैम उस कुत्ते को बचाने के लिए बेचैन थी..सबसे कहा पर किसी ने साथ नहीं दिया...पड़ोसी भी बोले कि हम क्यों बचाएं...लेकिन देबोश्री मैम और उनके बेटे ने हार नहीं मानी और बचा लिया एक जीव को।काश: सभी लोग ऐसे ही होते,तो मानवता इतनी नहीं तड़पती।
हमारे समाज में तो कुछ लोग अपनी तीखी,कर्कश,कमेंट वाली आवाज से कोहराम मचाते हैं....और साथ में राम-राम भी बोलते हैं। वाह!!!....क्या बात है??? तालियाँ.....
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