गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

मेरा पहला पॉडकास्ट

 इंसान को कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए....न जाने कब कौन-सा दरवाजा खुल जाए।मेरा ब्लॉग लिखना भी उसी कोशिश का नतीजा है....मैं नहीं जानती भविष्य में इस ब्लॉग का क्या होगा पर मेरी ईमानदार कोशिश जारी रहेगी।यही वजह है कि मैं रोज ब्लॉग लिखती हूँ चाहे मैं कितना भी थकी रहूं या व्यस्त रहूं..ब्लॉग लिखना मेरा रोज का रूटिन है और मैं करती रहूंगी।

आज की सुबह मेरे चौक पर लॉउडस्पीकर पर बजते माता रानी के भजन के साथ हुई....बिस्तर पर ही जब मेरे कानों में भजन गए तो मन प्रसन्न हो गया।आज हम सबने माता की आराधना की,उनको नमन किया।ये नौ दिन इतने खास बन जाते हैं कि इसका वर्णन हम शब्दों में नहीं कर सकते हैं। हमारे घर आने वाला " न्यूजपेपर " भी फूलों की खुशबू के साथ आया था...शायद ये उस न्यूजपेपर प्रकाशन की भक्ति ही थी जो नवरात्रि के शुरूआत पर अपनी खुशी जाहिर कर रही थी।सबका अपना अपना तरिका होता है प्रसन्नता व्यक्त करने का।

सुबह की चाय के बाद जब मैंने घड़ी देखा,तो सुबह के दस बज चुके थे और हमारी काम वाली बाई अभी तक नहीं आई थी....मेरे तो होश उड़ गए,क्योंकि थोड़ी देर में पेंटर आने वाला था और ऐसे में घर की साफ सफाई,बर्तन धोना सब पड़ा रह जाता,फिर मैंने हिम्मत जुटाई और खुद ही बर्तन धोना शुरू कर दिया।करीब दस मिनट बर्तन धोने के बाद मेरी काम वाली आ गई....वो बहुत उदास थी,जब मैंने कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके भाई के लीवर में पस भर गया है। पहले तो उसने बोला कि उसका भाई शराब नहीं पीता है पर बाद में उसकी चुप्पी ने बता दिया कि वो एक शराबी है।मैंने उसकी मदद की और समझाया कि उसका भाई ये जहर न पिए...इससे सिर्फ मौत ही मिलती है।उसके बाद बाई अपने कामों में लग गई। ऐसा क्यों होता है कि हम जानबुझकर लापरवाही करते हैं और परिणाम आने पर अपनी किस्मत को कोसते हैं।

मैं इस बात में हमेशा यकिन रखती हूँ कि इंसान अपना भाग्य खुद बनाता है और खुद ही बिगाड़ता है...जो जैसा कर्म करेगा उसे वैसा ही फल मिलेगा।

मैंने इंटरनेट पर पॉडकास्ट के बारे में पढ़ा था और कुछ वीडियो भी देखे थे...मुझे ये मंच बहुत अच्छा लगा,क्योंकि इसमें हम अपनी आवाज की प्रतिभा सबको सुना सकते है।तो बस सबसे पहले महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की और सोचा की नवरात्रि के पहले दिन ही अपने पॉडकास्ट की शुरूआत करूंगी।

मैंने पॉडकास्ट के विषय के बारे में बहुत सोचा...तभी मेरी नजर न्यूजपेपर पर गई और जब मैंने पढ़ा,तो पाया कि हमारे देश में नारी पर अत्याचार कितने बढ़ गए हैं और वो भी ऐसे देश में जहां नारी के देवी स्वरूप की पूजा होती है,कन्या पूजन होता है......उस देश भारत में कन्या का ये हाल,तो इसी विषय को आधार बनाकर और माता रानी को समर्पित करते हुए मैंने अपने पहले पॉडकास्ट की रिकॉडिंग कर ली और पोस्ट भी कर दिया।देखते हैं कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।

एक बात तो बताना ही भूल गई...जो आज के शीर्षक से बिलकुल अलग है...अरे भई !!!! बात मम्मी के हाथ के खाने की जो है...आज मम्मी ने बहुत मस्त वाली साबूदाने की पकौड़ी बनाई थी,जो इतनी स्वादिष्ट थी कि क्या कहे...लिखते हुए भी मुँह में पानी आ रहा है।

चलिए आज के लिए बस इतना ही,कल फिर मिलते हैं.....

----- अनुगुंजा

मोबाइल पर ये स्केचिंग मैंने बनाई है....




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