शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

न भाए मुझे परवल का भुजिया

 

मेरी मम्मी ने आज सिम्पल परवल का भुजिया बनाया,जो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता है।मम्मी ने पहले परवल को धोया फिर काटा,क्योंकि मम्मी कहती है कि पहले सब्जी को पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए...फिर उसके बाद काटना चाहिए,काटकर सब्जी कभी धोना नहीं चाहिए,इससे उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।परवल काटने के बाद कढ़ाई में तेल डाला,उसके बाद उसमें जीरा,सूखा लाल मिर्च,कसूरी मेथी का फोड़न डाला,फिर उसके बाद उसमें बारिक कटा प्याज डाला और उसे लाल होने तक भूना।इसी दौरान लहसून,हल्दी,नमक ,लाल मिर्च पाउडर के साथ कटा परवल डाल दिया।परवल चुकी पकने में समय लेता है इसलिए उसे प्लेट से ढक कर बनाया जाता है ताकि वो अच्छी तरह सीझ(पकना) जाए।बस बन गया परवल का भुजिया....मुझे परवल अपने बीया (बीज) के कारण पसंद नहीं आता है।वैसे घर में सबको परवल का भुजिया बहुत टेस्टी लगा।कसूरी मेथी स्वाद बदल देता है और हर खाने को टेस्टी बना देता है।

आज सुबह की चाय दो दिनों से बहुत सुकून वाली है...क्योंकि दो दिनों से पेंटर सब नहीं आ रहे हैं...असल में घर की पेंटिंग का काम लगभग खत्म हो चुका है थोड़ा ही बचा है...और इसी कारण अब पेंटर सब आनाकानी कर रहे हैं बचा हुआ छिटपुट काम करने में।आज की चाय हमारी हंसी-मजाक वाली रही...मामी और राजू मामा में बॉक्स रूम की सफाई पेंटर सबसे कराने को लेकर खूब मजाक हुआ।अंत में तय हुआ कि मुखियाइन(मामी की काम वाली बाई)का बेटा बॉक्स रूम की सफाई करेगा...जिसने अपना अपॉइंमेंट कल का दिया है,बड़ा व्यस्त रहता है बेचारा...डॉक्टर सबसे ज्यादा बीजी रहता है।मामी ने तो बोला है कि दस बार फोन करो तब ये घर से निकलता है....देखते हैं कल काम शुरू होता है या नहीं?

आजकल तो दिवाली-धनतेरस को लेकर हर दुकान,मॉल,ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स...सब ऑफर ही दे रहे हैं,समझ में नहीं आता है कि किसे खरीदे और किसे नहीं...वैसे कल और परसो भाई की छुट्टी है तो फिर हमारी शॉपिंग चलेगी।जो लूंगी...सब आप सबको दिखाऊंगी,मामी ने बोला है कि भारत जलपान के पास कपड़ों का बहुत बड़ा होलसेल दुकान है....वहां जाने का हम सोच रहे हैं भाई के साथ।फिर पंकज मार्केट से भी बहुत कुछ खरीदना है....ये सबके बारे में मामी ही बताती है...उन्हें सब पता है,कहां क्या मिलेगा...हर समस्या का हल है उनके पास। अंग्रेजी में बोलेंगे...शी इज सुपर वुमन...

आज मैंने एक कविता लिखी है....जो आज के समय में बिगड़ते बच्चों पर हैं....जरूर पढ़े....

उम्मीद करती हूँ...आपको अच्छा लगेगा...
तो आज के लिए बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं...
----- अनुगुंजा



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