बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

बिल्ली-चूहा की टॉक

 


विश्व प्रसिद्ध कार्टून " टॉम एंड जेरी " को कौन नहीं जानता है,हम सबने टीवी पर ये कार्टून खूब देखा है....आज भी जब हम इस कार्टून के बारे में सोचते हैं तो हमारे चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।वक्त बदलता है,उम्र बढ़ती है पर बचपन हमेशा हमारे अंदर जिन्दा रहता है और इसे जिन्दा रहना भी चाहिए।आज मैंने अपने मोबाइल से कुछ ऐसी तस्वीरें ली,जो मुझे बचपन में ले गया...ऊपर फोटो देखकर आप कुछ कुछ समझ ही गए होंगे...आइए....थोड़ा सोचते हैं कि चूहा और बिल्ली आपस में क्या बात कर सकता है,एक टॉक टॉक खेलते हैं---

छोटू(बिल्ला) बोल रहा है फोन पर--- भई !!!! चूहे,क्या तुम जानते हो...रोहू मछली तीन सौ रूपये किलो है...

चूहा-- छोटू भई!!!! मैं तो कुर्सी पर बैठा हूँ,मुझे क्या मतलब....हां तुम्हारे प्लेट से लूट कर मैं खा लेता हूँ।मेरी संख्या ज्यादा है और मैं  चूहेदानी में नहीं फंसता...बल्कि दूसरों को फंसाता हूँ।

छोटू-- तुमने राशन की लाइन देखी है?

चूहा--- मैं तो बस पांच साल पर प्रकट होता हूँ और फिर जिन्न की तरह अपने चिराग में छुप जाता हूँ।

तो....कैसी लगी ये टॉक टॉक....जरूर बताए...

ये लिट्टी देखकर ये न सोचे कि इसे हमने बनाया है...अरे !!! आज मेरी काम वाली बाई सुबह दस बजे तक आई ही नहीं...जब फोन किया तो उसके बेटे ने बोला कि रास्ते में है..दो घंटा में तो मुजफ्फरपुर से पटना पहुंच सकते हैं पर मेरी बाई मेरे घर तक नहीं पहुंची।तब तक मुझे और मम्मी को बहुत भूख लग गई थी...तो मैं अपने चौक पर गई और गरमा गरम लिट्टी लेकर आ गई।मेरे चौक पर का लिट्टी-समोसा बहुत टेस्टी होता है और सबसे बड़ी बात अच्छी क्वालिटी का भी होता है गला बिलकुल नहीं जलता है।तो हमारा आज का नाश्ता हमारी बाई की कृपा से लिट्टी ही रहा।
देर बहुत हो गई थी...इसलिए मम्मी ने फटाफट आलू का भुजिया बना डाला,हम सबने दाल-भात(चावल) और आलू का भुजिया खाने में खाया।वैसे मम्मी ने कल वाली बची बेसन की सब्जी को कसूरी मेथी के फोड़न से गर्म कर लिया था...जिससे उसका टेस्ट और भी अच्छा हो गया था।
आज सुबह वाली चाय हमारी थोड़ी धड़फड़ी वाली थी...क्योंकि पेंटर सब आ गए थे ग्रिल को पेंट करने...और हमारे राजू मामा ने जल्दी जल्दी में मामी को भी आराम से बात नहीं करने दिया,हम सबने अपनी जल्दी चाय खत्म की और बरामदे को पेंटिंग के लिए खाली कर दिया।आज कोई चर्चा हुई ही नहीं....
मौसम तेजी से बदल रहा है...पछुआ हवा चल रही है,मम्मी कहती है कि यही हवा ठंड लेकर आएगी।
तो बस आज के लिए इतना ही....कल फिर मिलते हैं...
----- अनुगुंजा






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