शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

नीला सूट(खोया-पाया )

 आज मुझे इस बात पर पूरा विश्वास हो गया कि हर कुछ के मिलने का समय निश्चित होता है...समय से पहले कुछ भी नहीं होता है।आज से करीब दस-पंद्रह साल पहले मेरा एक नीला सूट अचानक गुम हो गया था वो सूट प्लेन ब्लू रंग में था पर उसका कपड़ा बहुत मुलायम था और मेरा सबसे फेवरेट सूट था।मैंने और मम्मी ने उस सूट को घर में हर जगह खोजा,यहां तक कल  भी उसे खोज ही रहे थे...होता है न,कि कोई कोई सामान हमारे दिल के बहुत करीब हो जाता है और उसका भुलाना हमें दुख देता है।मम्मी और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो सूट जिन्न की तरह गायब कहां हो गया? इतने साल बीत गए पर जब भी कोई भी चर्चा होती थी तो मम्मी और मैं जरूर उस नीले सूट की बात करते थे।मानो वो सूट न होकर भी हमारे बीच था।आप सोच रहें होंगे कि बहुत महंगा होगा....तो बता दूं कि वो बहुत सस्ता सूट था एकदम सिंपल...पर फिर भी खास था,पता नहीं क्यों? शायद मम्मी और मैंने बहुत प्यार से सिलवाया था।

तो आज मुझे एक बहुत पुराना कपड़े वाला बैग मिला,मैंने सोचा कि वो पुराना बैग अपनी काम वाली बाई को दे देती हूँ...इतने पुराने बैग में हमारी जरूरत का कोई सामान थोड़े ही होगा,मगर अचानक मेरी मम्मी उस बैग को खोलकर देखने लगी....क्योंकि मेरी मम्मी कोई सामान जल्दी नहीं हटाती है घर से,बताया था न पिछले ब्लॉग में।फिर तेज आवाज में मम्मी " अनु " बोलकर चिल्लाई...मैं तो डर गई कि क्या हुआ,मैं जब मम्मी के पास गई तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था....मम्मी के हाथों में बरसो पुराना मेरा वही गुम हुआ नीला सूट था।आप भी देख ले...मेरे अतिसाधारण नीले सूट को...जो आम होकर भी खास है...


मुझे और मम्मी को इस सूट के लिए बस गुमशुदा केंद्र या खोया-पाया विभाग में जाने भर की देर थी....मजाक नहीं कर रही हूँ,सच में मुझे और मम्मी दोनों को बहुत प्यारा है ये सूट।इस घटना ने मुझे बताया कि ईश्वर हर चीज के मिलने या होने का समय निर्धारित करता है....और वो चीज उसी तय समय में हम तक पहुंचती है या हम उस तक पहुंच जाते हैं।मेरे भाई ने बहुत सी प्रतियोगिता परीक्षा दी,पी.टी..मेन्स पास भी किया.... इंटरव्यू भी दिया पर एक नम्बर-आधे नम्बर से उसका छूट गया....बहुत निराश होता था वो अपनी इस लगातार मिलती असफलता से,मगर उसने कोशिश नहीं छोड़ी,देता रहा परीक्षा और आज वो भारतीय जीवन बीमा निगम में डेवलपमेंट ऑफिसर है।हम सबको उसपर गर्व है।शायद इसलिए किसी ने कहा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती......अगर मम्मी दुबारा सूट खोजने की कोशिश नहीं करती तो वो हमें कभी नहीं मिलता।

भाई जी की तारिफ तो बहुत हो गई...अब जरा टांग खिचाई मैं करती हूँ...पर पहले ये फोटो देखे---


कुछ याद आया? जिनको याद नहीं आ रहा है वो कृपया मेरा कल वाला ब्लॉग पढ़े.....आज मेरे पापा मेरे लिए दाल वाली पूड़ी ले आए और मेरे मंथरा भाई का मुँह बन गया...बेचारा...

आज तो मुझपर अन्न देवता मेहरबान थे एक तरफ पूड़ी आ गई और दूसरी तरफ दिन के खाने में मम्मी ने रेस्टोरेंट से पनीर हांडी और चना दाल फ्राई मंगवाया....किसी खुशी में नहीं,बल्कि रसोईघर की फाइनल पेंटिंग चल रही थी गैस का चूल्हा बंद था इसलिए......खैर वजह जो भी हो,मेरी तो मौज हो गई....देखिए मेरी थाली....


तो आज मैं अपने भाई से जीत गई....मन खुश हुआ...

नजर का धोखा पढ़े लिखे इंसान को भी मूर्ख बना देता है...मेरी मम्मी के पास पढ़ाई की डिग्री कोई कमी नहीं है पर कल से मम्मी मुझसे कह रही थी कि तुमने ढेर रूपये वाला सिक्का देखा है? मैंने बोला ऐसा सिक्का अबतक तो नहीं आया है पर वो मानी नहीं और फिर बड़े उत्साह के साथ सिक्का दिखा डाला....सिक्का देखकर मैं और मेरा भाई खूब हंसे,असल में वो एक रूपया का सिक्का था जो भारतीय डाक के ढेर सौ वर्ष पूरे होने की खुशी में निकाला गया था....आप भी देखे मेरी मम्मी का ढेर रूपया वाला सिक्का....और हंसे...


तो चलिए आपको हंसता हुआ छोड़कर जाती हूँ...कल फिर मिलती हूँ....एक नए ब्लॉग के साथ....

----- अनुगुंजा





2 टिप्‍पणियां:

Please do not enter any spam link in the comment box.

जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...