आज मैं अपने ब्लॉग की शुरूआत मोर पंख के इस फोटो से करती हूँ....हमारा घर किसी किले में छुपे रहस्य से कम नहीं होता है पता नहीं कब,क्या मिल जाए,जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।तो आज मुझे मेरे घर के स्टोर रूम से मिला ये मोर पंख....जो कई सालों से यहां पड़ा था पर आज भी देखने और छूने में उतना ही सुंदर लगता है जितना ये नया के समय लगता था।मेरी नानी भगवान श्रीकृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी...रोज भगवत गीता पढ़ती थी।आज जब मयूर पंख देखा तो ये सब यादें ताजा हो गई....साथ ही साथ हमारे स्कूल और मोर पंख का प्रसिद्ध किस्सा भी याद आ गया...हम सब अपनी कॉपी में मोर पंख छुपाकर रखते थे उसे चॉक का पाउडर खिलाते थे(मानो वो कोई जीवित चीज हो) और ये उम्मीद करते थे कि वो मोर पंख एक का दो हो जाएगा......आज जब ये बातें सोचती हूँ तो अपने मासूम बचपन पर हँसी आती है,हम बचपन में क्या क्या सोच लेते थे और उसपर विश्वास भी करने लगते थे।
हम चाहे घर में टेस्टी से टेस्टी खाना क्यों न बना ले,पर कई बार बाहर का खाना खाने का मन करता ही करता है...मुझे पिज्जा,बर्गर,गुपचुप,चाऊमिंग,फ्रेंच फ्राई बिलकुल नहीं पसंद है,मैं जानती हूँ कि आपको ताज्जुब हो रहा होगा पर क्या करूं मैं ऐसी ही हूँ।मुझे सड़क के किनारे छोटी सी दुकान पर बनने वाला समोसा...लाल चटनी के साथ,लिट्टी,पॉवभाजी,ठेला पर मिलने वाला छोला भटुरा बहुत अच्छा लगता है।मेरे भाई की जुबान में मुझे रोड छाप खाना अच्छा लगता है,बड़े रेस्टोरेंट,कैफे का हाई-फाई खाना मुझे हजम नहीं होता है।तो आज हुआ ये कि मेरे पूज्य पिता जी ने मुझे बताया कि मोतीझील में कहीं दाल वाली पूड़ी और आलू की मस्त सब्जी किसी ढाबे या गुमटी ( छोटा दुकान) पर मिलती है,मैंने पापा को मना लिया था कि आज मेरे लिए पापा वो लेकर आए....पर मेरे भाई ने नारद बनकर मेरा सारा काम बिगाड़ दिया।मम्मी और पापा को इतना भड़काया कि उन्होंने मुझे वो दाल वाली पूड़ी मंगवाने से मना कर दिया।मेरे भाई को मेरे लीवर की चिंता अचानक हो गई और बोलने लगा कि वो सब तीसी के तेल में बनाते हैं इससे पेट खराब हो जाएगा।जब मम्मी ने मना कर दिया उस खाने को,तो एक मंथरा टाइप मुस्कान बिखेरता हुआ मेरा भाई अपने काम पर चला गया और साथ में वो " यस यस " भी कर रहा था,बदमाश !!!!!! भाई....
यही तो खूबी होती है भाई-बहन के रिश्ते की....जिससे हम सबसे ज्यादा लड़ते भी है,टांग भी खींचते हैं और सबसे ज्यादा प्यार भी करते हैं।वैसे बता दूं कल मेरा भाई मेरे लिए समोसा-लिट्टी लेकर आया था....मुझसे बहुत प्यार करता है पर ...हां,टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ता है।लव यू भाई......
आज मैं कुछ स्वास्थ्य पर आपको बताना चाहती हूँ....हमारे शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना बहुत खतरनाक होता है,इससे बहुत तरह की बीमारी हो सकती है...खासतौर से जोड़ो की.......दाल तो हम सब रोज कूकर में बनाते हैं तो क्या आप जानते हैं कि थोड़ी सी सावधानी बरत कर आप अपने दाल को यूरिक एसिड से मुक्त कर सकते हैं।तो जाने कैसे---
1. दाल को अच्छी तरह चार पांच पानी से धो ले,जबतक दाल में रखा पानी साफ न दिखने लगे।
2. दाल को लगभग एक घंटा पानी में डालकर रखें।
3.कूकर में दाल बिना छौंक के, सीधे दाल,हल्दी,नमक,पानी डालकर गैस पर चढ़ाए और कूकर का ढक्कन न लगाए।
4.कूकर गर्म होते ही दाल में से फेन निकलना शुरू हो जाएगा...यही फेन कारण बनता है यूरिक एसिड बढ़ाने का..तो करछूल की मदद से कूकर से सारा फेन बाहर निकाल ले और फिर कूकर का ढक्कन बंद कर दाल को गैस पर चढ़ा दे।
यकीन मानिए...इससे आपको पेट में गैस,एसिडिटी,यूरिक एसिड आदि में जरूर आराम मिलेगा।फोटो डालती हूँ---
ये दाल वाली बात मैंने अपने मोबाइल पर किसी चैनल पर देखी थी,मुझे अच्छी लगी तो मैंने अपनी मम्मी और मम्मी दीदी(मौसी) को भी बताया...जब से वो ऐसी दाल बना रही हैं उन्हें फायदा दिख रहा है।आप भी ट्राई करें।
तो बस आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं....
----- अनुगुंजा
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