हमारा घर बहुत पुराना है....लगभग 1960 का बना है।तो जाहिर सी बात है..घर का खिड़की-दरवाजा भी पुराना ही होगा,जबतक घर का पेंट नहीं हुआ था तबतक पूरा घर अंधेरा जैसा लगता था...सूर्य की रौशनी भी अपनी चमक बिखेर नहीं पाती थी और हमारा घर बहुत बूढ़ा जैसा लगता था।अब जब पेंटिंग हो रही है तो पूरा घर किसी बच्चे की तरह मुस्कुरा रहा है....,छत-दीवारें वही है...पर घर नया लगता है।एक नई ऊर्जा महसूस होती है...शाम-रात में भी घर से रौशनी फूटती है...इससे मन बहुत खुश रहता है।शायद इसे ही पॉजिटिव एनर्जी कहते हैं।तो सही कहा जाता है कि अगर हमें अपनी जीवन में बदलाव लाना है,निरसता को दूर करना है...तो हमें सबसे पहले अपने घर में बदलाव लाना चाहिए...
जरूरी नहीं है कि हम हमेशा अपने घर का पेंट करवाते रहे या दीवारों के रंग बदलवाते रहे...अगर हम अपने घर में रखे सामानो का जगह भी बदल दे.जैसे- ,टीवी,फ्रिज,पलंग,सोफा सेट,डाइनिंग टेबल....आदि के रखने वाली जगह में चेंज ले आए ...तो इससे भी घर में पॉजिटिविटी आती है।एक पॉजिटिव अच्छी सोच पूरे घर के माहौल को खुशनुमा बना देती है।तो जीवन के साथ घर में भी बदलाव जरूरी है।हमारी पुरानी खिड़की नई बन गई है....आप भी देखे----
उम्मीद करती हूँ हमारी खिड़की आपको भी पसंद आई होगी।ये तो बात थी हमारी सोच के अनुसार होने वाले बदलाव की...लेकिन कभी कभी जिन्दगी बिना हमसे पूछे अपनेआप चेंज ले आती है,ये बदलाव अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी।कहते है न कि कोयले की खादान में हजारों काम करते हैं पर हीरा किसी किसी को ही मिलता है और कभी किसी सुपर स्टार का बेटा नशा(ड्रग) लेने का कारण जेल की हवा खाता है...उस सुपर स्टार के जीवन में भी जो बदलाव आया,वो किसी डरावने सपने की तरह होगा,उम्मीद करती हूँ आप उस सुपर स्टार का नाम गेस कर लिए होंगे।
जब हमारे परिवार का कोई सदस्य हमसे दूर जाता है तो मन बहुत दुखी हो जाता है।एक तरफ तो हम उसकी कामयाबी की मंगलकामना करते हैं वही दूसरे तरफ उसकी कमी भी बहुत खलती है।मेरे मामा का बेटा " भास्कर " ...मेरा भाई ...आज अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए खड़गपुर चला गया....हालाकि भास्कर से मेरी रोज बात नहीं होती थी बस आते-जाते हम मिल लेते थे...लेकिन फिर भी जब वो जा रहा था तो मन बहुत खाली खाली लग रहा था और घर भी बहुत सूना लग रहा था।कोरोना के कारण मेरा भाई भास्कर लगभग दो साल से घर पर ही था...ऑनलाइन पढ़ाई करता था पर जब कॉलेज खुला तो उसे जाना पड़ा।भाई जब जा रहा था तो उसे गेट तक छोड़ने की हिम्मत भी मेरी नहीं हुई।मैं ऊपर से देखती रही और उस समय मेरी आँखों में आंसू आ गए थे....शायद यही होता है भाई-बहन का रिश्ता,राखी के धागे की डोर बहुत मजबूत होती है पर अनेक बार आंसू से भीग भी जाती है।छठ-दिवाली में भी भास्कर को छुट्टी नहीं मिलेगी...ये सुनकर मन और दुखी हो गया।खैर !!!!बहन हमेशा दुआ देती रहेगी कि तुझे सफलता जरूर मिले।
आज छोटू( बिल्ला) की तबियत ठीक नहीं थी...जैसा कि मैंने पहले बताया था कि छोटू अपाहिज है सामान्य बिल्ली की तरह दौड़ नहीं सकता है,छलांग नहीं लगा सकता है... बस किसी तरह चल लेता है।छोटू हमेशा घर में ही रहता है,कहीं बाहर नहीं जा सकता है....मेरा भाई रिषभ उसे अपने साथ,अपने पलंग पर सुलाता है....वो भी पलंग पर दो-तीन चादर से गोल गोल घेर कर घोंसला जैसा बनाकर,जिसे " गुज्जु " हम सब कहते हैं और छोटू भी ये गुज्जु शब्द को खूब समझता है।जैसे ही छोटू के मन लायक गुज्जु तैयार हो जाता है छोटू झट से आकर गुज्जु में बैठ जाता है.......अगर गुज्जु उसके मन लायक नहीं बनता है तो छोटू अपने पैर से ठीक करने की कोशिश करता है।छोटू के स्पाइन में तकलीफ है,शरीर का पिछला हिस्सा बहुत कमजोर है....आज छोटू का पिछला पैर कांप रहा था,थोड़ा चलने पर ही बैठ जाता था। उसके डॉक्टर से मम्मी बात की और डॉक्टर के अनुसार दवा दे रही है....उम्मीद करते हैं हमारा छोटू ठीक हो जाए।ये देखिए...हमारे छोटू को----
आज खाने में कुछ खास नहीं बना...क्योंकि छोटू बीमार था।हमारे घर में जो पेंटर काम कर रहें हैं वो बूढ़े हैं पर अपने काम में एकदम ईमानदार है।पेंटिंग बहुत अच्छे से करते हैं,सुबह नौ बजे से लेकर शाम के चार बजे तक लगातार काम करते हैं....बीच में सिर्फ एक बार खाना खाने जाते हैं।हम उन्हें चाय और पानी देते रहते हैं।कितनी बार जब शाम के चार बज जाते हैं और उनका काम बचा रहता है तो वो बिना घड़ी को देखे अपना काम पूरा करते हैं...फिर चाहे पांच ही क्यों न बज जाए।जाने से पहले सारा सामान जगह पर रख देते है....और अपनी मर्जी से एक्सट्रा काम भी कर देते हैं(जैसे आइना साफ करना).....उनसे ये सीखने को मिलता है कि हमें हमेशा अपने काम में अपना बेस्ट देना चाहिए।
तो बस आज के लिए इतना ही....कल फिर मिलते हैं----
----- अनुगुंजा
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