रविवार, 17 अक्टूबर 2021

रोहू मछली फ्राई

 जितने भी मांसाहारी( नॉनवेज खाने वाले) है उनके मुँह में पानी आ गया होगा...इस ब्लॉग का टाइटल पढ़कर,रोहू मछली फ्राई खाने की बात ही कुछ और होती है।आप ये न सोचे कि चुकी मैं मछली खाने की बात कर रही हूँ तो मैं मांसाहारी हूँ...

न बाबा रे!!!!....मैं शाकाहारी हूँ और मेरा भाई भी,लेकिन हमारे घर में हमारे मम्मी-पापा और छोटू( बिल्ला) पूरी तरह से मांसाहारी है।आपको ये जानकर ताज्जुब होगा कि मेरा भाई जन्म से शाकाहारी है पर वो अपने प्यारे छोटू के लिए मछली लेने न सिर्फ मछली बाजार जाता है,बल्कि अच्छे से देखकर ताजी मछली ही लाता है।ये होता है सच्चा प्यार....जो किसी बंधन का मोहताज नहीं है।छोटू बहुत बीमार रहता है,पर जब मछली खाता है तो बहुत खुश हो जाता है...तो बस उसके लिए।आप जानते हैं छोटू बिल्ला है पर मम्मी जब भी उसे मछली खाने को देती है तो पूरी तरह से कांटा निकाल कर,ताकि कांटा उसके गले में न अटक जाए।कुछ साल पहले छोटू के गले में ट्यूमर हो गया था जो जब फटा तो छोटू के गले में छेद हो गया था,जिसे मेरे भाई ने दिन रात की सेवा,ड्रेसिंग,दवा से पंद्रह दिनों में भर दिया।इसलिए हमारे घर की जान है छोटू।

मम्मी का सबसे फेवरेट मछली ही है....और जब ताजा मछली आता है तो मम्मी की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है।तो बस छोटू बाबू पहले से रसोईघर में बैठ गए...और मम्मी ने मछली बनाना शुरू किया।मछली को सबसे पहले गर्म पानी और नींबू से अच्छी तरह साफ किया,फिर उसमें हल्दी,नमक,लहसून डालकर अच्छी तरह से सान( मिला) लिया....तब तक कढ़ाई का तेल गर्म हो चुका था...तो बस एक एक करके मछली का पीस तेल में डालकर छानती गई।मछली में रस नहीं लगाया,क्योंकि छोटू को रस पसंद नहीं है।सबसे पहले छोटू जी ने मछली खाया....बाकि सब बाद में....

आज मैंने दाल,भात( चावल ) और आलू का चोखा( आलू का भरता)खाने में खाया और साथ में कल वाला सोयाबिन का भुजिया भी खाया,जैसा की मैंने पहले बताया था कि मेरी मम्मी खाना बर्बाद नहीं होने देती है जब तक खाना खाने योग्य रहे...रोज रोज मसालेदार खाना ठीक नहीं होता है,कभी कभी सादा खाना भी खाना चाहिए।

जब हम कुछ ऑनलाइन सामान मंगवाते हैं,तो कभी कभी हम भी भूल जाते हैं कि क्या मंगवाया था.....आज जब पार्सल आया और मैं नीचे जाकर उसे लेकर ऊपर आई,तो भाई का पहला सवाल यही था कि हमने क्या मंगवाया था? फिर बिना टाइम बर्बाद किए हमने पहले हाथों से पैकेट खोलने की कोशिश की...जब नहीं हुआ तो कैंची का सहारा लिया।पैकेट से निकला कर्टन( परदा) जिसे हमने अपने बरामदे के लिए लिया था...कलर और कपड़ा दोनों बहुत प्यारा है,मैं इसका फोटो डाल दूंगी।ये कर्टन हमारे दीवार के कलर से बहुत अच्छा मैच कर रहा है....आखिर पसंद मम्मी की जो है।इसके साथ भाई ने प्लास्टिक के कुछ छोटे छोटे प्लांट (पौधे) भी मंगवाए थे...जो घर की सजावट में काम आएगा,उसका फोटो भी डाल दूंगी।मोबाइल पर ऑनलाइन शॉपिंग मन को बदल देता है,एक नई ताजगी ले आता है....आप कुछ सामान खरीदे या न खरीदे,पर देखने मात्र से मुड फ्रेश हो जाता है।हालाकि मेरी मम्मी ज्यादा मोबाइल पर आँख गड़ाकर उसे देखने के सख्त खिलाफ है,पर क्या करें..हम भाई-बहन डांट सुनकर भी मोबाइल पर शॉपिंग कर ही लेते हैं।

आज दो दिन के बाद मुझे न्यूजपेपर के दर्शन हुए....मन को बड़ी शांति मिली,ऐसा लगा कि दो दिनों से मैं पिंजड़े में बंद थी दिन दुनिया की कोई खबर ही नहीं थी।न्यूजपेपर पढ़ना मेरी आदत है वो भी बचपन की।लेकिन जब आज पढ़ा तो दुख ही हुआ...इन दो दिनों में न जाने कितने ऐसे खबर सामने आए,जिसे पढ़कर मन कांप गया।ऊपर से लगभग दो सालों से चलने वाले किसान आंदोलन ने तो सारी हदे ही पार कर दी....इंसानियत जैसी कोई चीज भी होती है यही भूल गए और हैवानियत कर डाली।न्यूजपेपर या न्यूजचैनल को देखकर जब मुझे बहुत गुस्सा आता है तो फिर मेरी कलम चल पड़ती है।एक कविता लिखी है आप देख ले...फोटो डाल देती हूँ।

तो चलिए आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं...

------- अनुगुंजा

परदा-----


मछली फ्राई-----
मेरी कविता------



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any spam link in the comment box.

जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...