शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

अक्टूबर में जून

 प्रकृति कब क्या करवट ले,ये कोई नहीं बता सकता है।कल तक अक्टूबर वाली हल्की हल्की ठंड जैसे सुहावने मौसम का आनंद हम ले रहे थे पर आज सुबह से ही जैसे प्रकृति ने अपना मूड पूरी तरह बदल लिया।आज एक उमस भरी,गर्म हवा वाली " लू " जैसी गर्मी हम सबको झेलनी पड़ी....दिन में खिड़की से गर्म हवा थपेड़े मार रही थी,नाक से गर्म सांसें आ रही थी,आँखों में जलन था...गला सूख रहा था और पसीना बेतरह हमारे शरीर से बरस रहा था।ये हाल शाम में भी है....अभी जब मैं ब्लॉग लिख रही हूँ तो एक अजीब जैसी गर्मी का एहसास कर रही हूँ।मम्मी बोल रही थी कि ये तो जून वाली गर्मी है,जो अक्टूबर को तपा रही है।मौसम ने ऐसा रूप अचानक क्यों बदला? इस सवाल का जवाब मुझे नहीं मिल रहा है....क्या ये ग्लोबल वार्मिंग का प्रकोप है या कुछ और? आप कमेंट में जरूर बताएं।

क्रिकेट के पिच पर जैसे सचिन-सहवाग की जोड़ी रनो की बौछार करती थी..वैसे ही मेरी और मम्मी की जोड़ी कामों की बौछार को संभाल लेती है।हम दोनों मिलकर हर मुश्किल काम को कर लेते हैं।हमारी ट्यूनिंग बहुत अच्छी है,नजर न लगे....क्योंकि अगर नजर लग जाएगी तो मम्मी का गुस्सा मुझपर फट पड़ेगा और डांट की बौछार हो जाएगी।ये तो मजाक की बात हो गई....आज इस गर्मी में मैंने और मम्मी ने घर की साफ सफाई का काम बहुत हद तक निपटा दिया,अब थोड़ा ही बचा है।काम करते करते कब दोपहर के एक बज गए...हमें पता ही नहीं चला,इस दौरान हम दोनों ने " चाय की चुस्की " का आनंद भी लिया...और खूब सारे गप्पे( बातें) भी मारे,मस्ती-मजाक भी किया....

तो जब दोपहर के एक बज गए,तब हम रसोईघर में गए।मम्मी ने झट से एक कूकर में दाल चढ़ाया और दूसरे तरफ कढ़ाई चढ़ाई,मैं जल्दी से अपने छत पर गमले में लगे कड़ी पत्ता को तोड़ लाई....फिर कढ़ाई में तेल डाला और हींग-कड़ी पत्ता,जीरा,सूखा लाल मिर्चा का फोड़न डाला....उसके बाद  मैंने प्याज-टमाटर काटा और कढ़ाई में डाला, जब प्याज लाल हो गया और टमाटर गल गया तो लहसून-अदरक का पेस्ट डाला...फिर उसे दस मिनट तक भूना,वो भी तेज आंच पर।उसके बाद उसमें हल्दी,धनिया पाउडर,लाल मिर्च पाउडर,गर्म मसाला पाउडर और नमक डाला....दस मिनट भूना।

अरे !!!!! मैं तो ये बताना ही भूल गई कि मैं किसकी सब्जी या भुजिया बनाने जा रही हूँ.....देखिए,सब गर्मी का असर है...

आज सुबह ही मम्मी और मैंने डिसाइड कर लिया था कि हम आज " सोयाबिन " का भुजिया बनाएंगे....कुछ लोग सोयाबिन को न्यूट्रिला या मिनी चंक भी कहते हैं।तो हमने पानी में सोयाबिन को डालकर गैस पर चढ़ा दिया,जब ये खौलने लगा तो गैस से नीचे उतार दिया।ठंडा होने पर हाथों से निचोर कर सोयाबिन का सारा पानी निकाल लिया....गर्म पानी से सोयाबिन बहुत सॉफ्ट हो जाता है।फिर कढ़ाई में तेल डाला,उसमें थोड़ा सा जीरा,हल्दी,धनिया पाउडर डाला और सोयाबिन को डाल दिया....और भूना।अच्छी तरह से भून जाने पर गैस बंद कर दिया और प्लेट में कढ़ाई से सोयाबिन निकाल लिया।उसके बाद  जब कढ़ाई का मसाला अच्छे से लाल हो गया,तो उसमे सोयाबिन डाल दिया और दस मिनट तक भूना।इससे सोयाबिन एक दम ड्राई जैसा हो गया और लाल भी हो गया....फिर गैस बंद कर इसे उतार लिया...और हां,गैस से उतारने से पहले मैगी मसाला( सब्जी वाला) डाला।बहुत टेस्टी बना सोयाबिन का भुजिया....आप भी जरूर बनाए।

हमारे जीवन में न्यूजपेपर का बहुत महत्व है,कभी भी टीवी या मोबाइल पर दिखाए जाने वाले न्यूज चैनल...न्यूजपेपर का स्थान नहीं ले सकते हैं।जब जब हम तक न्यूजपेपर नहीं पहुंचता है तब तब हमें इसके महत्व का एहसास होता है।यही होती है शक्ति प्रिंट मीडिया की....जो रोज सुबह सवेरे हमारे दरवाजे पर ताजी खबरों की खुशबू को पेपर में समेट कर हॉकर के हाथों से हम तक पहुंचाती है।हमारी सुबह की चाय अधूरी रह जाती है अगर न्यूजपेपर न मिले तो....हम पूरा घर तहस-नहस कर देते हैं उसकी खोज में।टीवी पर न्यूज चैनल तो एक ही खबर को बार बार दिखाते रहते हैं पर आज का न्यूजपेपर कल बासी हो जाता है....जिसकी कोई कद्र नहीं रहती,फिर वो केवल कबाड़ी वाले को बेचने के काम आता है।

आप सोच रहे होंगे...कि आज मैं न्यूजपेपर का इतना गुणगान क्यों कर रही हूँ....तो भई!!! विजयादशमी की छुट्टी के कारण न्यूजपेपर दो दिनों से नहीं आ रहा है अब सीधे सतरह तारिख को आएगा....तो उसकी कमी बहुत खल रही है।

तो चलिए...आज के लिए...बस इतना ही..

कल फिर मिलते हैं....

----- अनुगुंजा

सोयाबिन का भुजिया----


आज का गर्म मौसम



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