शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2021

लकड़ी का रेहल मिला

 जब भी हम अपने घर की साफ सफाई करते हैं,खासतौर से स्टोर रूम की...तो कुछ न कुछ ऐसा जरूर मिलता है जो हमको चौंका देता है।आज जब मैं सफाई कर रही थी तो अचानक मेरे हाथ लकड़ी का कुछ लगा...मुझे लगा कि कोई बेकार सामान होगा और मैं उसे फेंकने के लिए कचरे के डब्बे के पास गई....तभी मेरी मम्मी अपनी आदत के अनुसार मुझे रोकी।मेरी मम्मी का पेशेंस लेबल बहुत तगड़ा है वो एक एक झोले से सामान निकालकर देखती है,छांटती है....फिर फेंकती है।मम्मी की इस आदत से कभी हम,तो कभी मेरा भाई भी चिढ़ जाता है।मुझे समझ में नहीं आता है कि आखिर मम्मी सब में इतना पेशेंस आता कहां से है? हम बच्चे तो तुरंत धैर्य खो देते हैं...अगर किसी रस्सी में बहुत कठिन गांठ भी पड़ जाती है तो हम तो सीधे मम्मी के पास जाते हैं और मम्मी बड़े आराम से धीरे धीरे कर हर गांठ खोल देती है।मुझे लगता है कि विधाता ने सभी मम्मी को स्पेशल पॉवर दिया है,जिससे वो अपने बच्चे की हर परेशानी की गांठ खोल देती है।हम अक्सर बोलते रहते हैं... " मम्मी ये नहीं हो रहा है,मम्मी वो सामान कहां है,मम्मी ये कागज मिल नहीं रहा है....."...और हमारी मम्मी किसी सुपर मैन सॉरी सुपर वुमन की तरह सब हल कर देती है।हमारे हर पजल को सॉल्व मम्मी ही करती है।

हां...मैं कहां से शुरू हुई थी और कहां चली गई....असल में मम्मी की बात जब भी होती है तो बात बहुत लम्बा सफर तय कर लेती है यही तो खासियत होती है माँ की।

तो मेरी मम्मी ने मुझे लकड़ी के उस सामान को फेंकने से रोका और बताया कि लकड़ी के इस सामान को                             " कलम-दवात का रेहल " कहते हैं....जो मम्मी की दादी के समय का है,इसमें लोग दवात(इंक) रखकर कलम डूबाकर डूबाकर कागज पर लिखते थे...मुझे देखकर बहुत ताज्जुब हो रहा था।मैंने आजतक ऐसा कभी नहीं देखा था,फोटो डाल दूंगी...आप भी देख ले।

अन्न,भोजन के महत्व का एहसास सबसे ज्यादा व्रत के बाद होता है,वरना हम बेफिक्र होकर अपनी थाली में खाना छोड़ देते हैं...उसे बर्बाद कर देते हैं।जो बहुत गलत आदत है..इस खाने के अभाव में न जाने कितने लोग भूखमरी का शिकार होते हैं,मर जाते हैं।तो आज जब व्रत के बाद मैंने खाना खाया,तो मुझे वो सबसे स्वादिष्ट भोजन लग रहा था।शायद इसलिए मम्मी हमेशा कहती है कि अपनी प्लेट में खाना छोड़ना...अन्न का अपमान होता है और ये बचा खाना हमारे हिस्से में जमा होता जाता है और जब अन्न की वो टोकड़ी हमारे बर्बाद खाने से भर जाती है तो दंड स्वरूप भगवान हमें बीमार कर देते हैं।ऐसा मेरी नानी भी कहती थी....मेरी नानी तो वो छोटी चिड़िया की कहानी सुनाती थी जो रात को तब आती है जब हम खाली पेट सोते हैं...वो चिड़िया अपने वजन के हिसाब से हमारे शरीर का मांस ले जाती है।मैं जानती हूँ ये सब बस कहावते हैं जिनका कोई आधार नहीं है....पर हमारी दादी-नानी ऐसी कहानी इसलिए सुनाती थी ताकि हम खाना बर्बाद न करें और रोज खाना खाकर सोए।

आज विजयादशमी है....अपने भाई के साथ जब मार्केट गई तो अजीब सा सन्नाटा फैला था...भीड़ थी पर एक उदासी थी।जिसके बारे में मैं अपने कल के ब्लॉग में चर्चा कर चुकी हूँ।

आज बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन है.....भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया,इसलिए हम रावण दहन में रावण के पुतले को जलाते हैं।ये सब हमारी संस्कृति है धर्म है....मुझे ऐसा लगता है कि इन्हीं मान्यताओं,संस्कृति,सभ्यता,धर्म ने हमें सही राह दिखाने की कोशिश की है और सदा करती रहेगी....हम ही इसे आजतक कभी समझ नहीं पाते और कभी अनदेखा कर देते हैं।असल में रावण हमारे अंदर है,जिसमें अहंकार है,लालच है,लोभ है,स्वार्थ है,दुष्टता है....और भी बहुत सी बुराई है....लेकिन हम हिन्दुस्तानी आजतक अपने अंदर के उस रावण का वध नहीं कर पाए हैं।

अभी जब मैं ये ब्लॉग लिख रही हूँ तो लॉऊडस्पीकर से मेरे चौक से जोर जोर से अनाउंसमेंट हो रही है कि " कृपाया फोटो न ले,सेल्फी न ले....जाम लग रहा है "...हालाकि बीच बीच में भजन भी बज रहा है....मैं यही सोच रही हूँ लोग इस हद तक लापरवाही क्यों कर रहें हैं? नियम का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं? .....श्रद्धा को भी मजाक बना देते हैं और दूसरों के लिए सिर का दर्द....आखिर बेचारे उस अनाउंसर को चिल्लाते चिल्लाते कितनी तकलीफ हो रही होगी,ट्राफिक पुलिस भी जाम से परेशान होगी......खैर ये वे लोग होते है जो कभी नहीं सुधरते हैं और किसी की परेशानी से इन्हें कोई मतलब नहीं होता है।

अरे!!!! एक बात तो बताना ही भूल गई....कल रात पापा टीवी देख रहे थे,शायद नाग-नागिन का कोई सीरियल था....तभी पापा जोर से बोले देखो टीवी के पीछे से सांप निकला....। हम सब तो डर गए और रात बारह बजे तक पूरे घर को छान मारा....पर कुछ नहीं मिला,फिर मिट्टी का तेल सभी जगह डाल दिया....हम सब खोजते रहें,....आज पापा बोले शायद मेरा भ्रम था,टीवी पर देख रहे थे तो वही सब दिमाग में होगा।अब पता नहीं ये भम्र था या सच्चाई....पर हम सब सतर्क हैं।

आज रात के खाने में मम्मी रोटी,दाल और आलू का भुजिया बनाएगी.....

चलिए आज के लिए बस इतना ही.....कल फिर मिलते हैं....

------ अनुगुंजा




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