गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021

रूप से बड़ा गुण

 जब हम किसी खूबसूरत चीज या इंसान को देखते हैं तो सबसे पहले उसके रूप की हम तारिफ करते हैं...हम उसके गुण के बारे में तनिक भी नहीं सोचते हैं।किसी खूबसूरत लड़की का दिल भी सुंदर हो ये जरूरी नहीं है....तो हमें किसी को भी जज उसके गुणों के आधार पर करना चाहिए।

आज मैं आपसे ये बातें इसलिए कह रही हूँ क्योंकि आज जब मम्मी ने मुझे सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने को दिया....तो हलवे की जली जैसी शक्ल( गहरा भूरा रंग) देखकर मेरी भूख ही मर गई और मैंने खाने से मना कर दिया।फिर मम्मी के बहुत जिद करने पर जब मैं मुँह बनाकर वो हलवा खाई,तो उसका टेस्ट मुझे बहुत अच्छा लगा और खाने के बाद व्रत की कमजोरी भी दूर हो गई।तब मुझे लगा कि हमें हमेशा महत्व गुण को देना चाहिए।

आज नवरात्रि का नौवा दिन है....जिसे हम महानवमी कहते हैं।मुझे हर साल महानवमी के दिन सभी जगह की माता रानी की प्रतिमा उदास लगती है,ऐसा लगता है कि नवरात्रि के समापन की उदासी माँ को भी होती है।ये सब भावनाओं की बात है...वैसे माँ कहीं नहीं जाती वो तो अपने बच्चों के साथ हर पल रहती है वो हैं तो ये धरती है।पर मान्यताओं के अनुसार माता की प्रतिमा का विसर्जन होता है....और मुझे हमेशा नवरात्रि के अंतिम दिन माता की प्रतिमा बहुत उदास लगती है।इसके साथ ही वातावरण में अजीब सा सन्नाटा फैल जाता है...जैसे बेटी की शादी के बाद जब वो ससुराल विदा होती है तो उसके मायके में उदासी फैल जाती है...वैसा ही कुछ महसूस होता है।ये भक्त और भगवान के बीच भक्ति भाव का रिश्ता है,तभी तो कृष्ण जन्माष्टमी में कान्हा को माखन खिलाया जाता है और गणपति देवा को मोदक का भोग चढ़ता है...भगवान प्रसाद खाते तो नहीं है पर भक्ति भावना ये सब नहीं मानती है।मेरे विचार से यही भक्ति भावना के कारण ये धरती बची हुई है,धर्म कायम है।

आज के दिन तो छोटी छोटी कन्याओं का पूजन भी होता है,भक्त पूरी श्रद्धा के साथ कन्या पूजन करते हैं।ये छोटी छोटी कंजकाएं लाल चूनड़ में साक्षात माता भगवती ही लगती हैं,जब ये अपने छोटे छोटे हाथों से आशीर्वाद देती हैं तो मन को परम सुख मिलता है।

यहां तक तो सब बहुत अच्छा लग रहा था पर जब मैंने आज न्यूजपेपर में कुछ खबरें पढ़ी,तो सोच में पड़ गई....कहीं कन्या जन्म पर परिवार ने उस नन्ही बच्ची को कचरे में फेंक दिया मरने के लिए,तो कहीं एक परिवार बच्ची को अस्पताल में छोड़कर भाग गया...क्या ये सब इंसान कहलाने का हक रखते हैं? जिस देश में कन्या के देवी रूप की पूजा होती है वहां...कन्या भ्रूण हत्या,बेटी को कचरा में फेंकना,बच्ची को जमीन में जिन्दा दफन करना....जैसी हैवानियत होती है।ये तो दो मुखी सांप से भी ज्यादा खतरनाक मानव कहे जाने वाले दानव है।

तो आज के लिए बस इतना ही....कल फिर मिलते हैं...

----- अनुगुंजा





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