मंगलवार, 16 नवंबर 2021

गाय माता का दर्द

ऊपर जो फोटो आप देख रहे हैं,वो बहुत आम फोटो है जिसे आए दिन हम कभी अपनी गली में,कभी मेन रोड पर देखते हैं।असल में हम इस दृश्य को देखने के आदी हो गए हैं,जो बहुत ही दुख की बात है।हमारे हिन्दु धर्म में जिस गाय को " माँ " माना जाता है उसकी ये दुर्गति देखकर हमारी आत्मा भी नहीं सिहरती है। गाय और उसके बछड़े सड़कों पर मरने के लिए भटकते रहते हैं,कूड़ा-कचरा खाते हैं..यहां तक की ये पॉलिथीन भी खा लेते है...यही कारण है कि ये गाय,बछड़े ज्यादा दिनों तक जिन्दा नहीं रहते हैं,वो मर जाते हैं।मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा उन पशुपालको या गौशाला चलाने वालों पर आता है जो अपनी दूध देने में असमर्थ हुई गाय को और गाय के बछड़े को निकाल देते हैं,या ये कहें कि जानबुझकर सड़क पर तड़प तड़पकर मरने के लिए छोड़ देते हैं।वैसे गौशाला चलाने वाले खुद को " हिन्दु " न कहे,तो ही बेहतर होगा...अपने ऊपर उन्हें शर्म आनी चाहिए,कैसे किसी बेजुबान को इतनी बेरहम मौत देते हैं। सड़क पर भटकने वाली गाय और बछड़े कभी ट्रक,बस,कार की ठोकर से जख्मी होकर मर जाते हैं,तो कभी ठंड,बारिश,गर्मी जैसी मौसम की मार को झेल नहीं पाते...." गाय कभी नाले का गंदा पानी नहीं पी सकती है,वो साफ पानी की तलाश में लोगों की बल्टी या नल में मुँह मारती है...पर लोग उस बेजुबान को कभी डंडा,तो कभी लाठी से मारकर भगा देते हैं अपने द्वार से,अपने गेट से....."

ऐसे लोग लाख पूजा-पाठ करवा ले,पर इन्हें इनके पाप कर्म की माफी ईश्वर से कभी नहीं मिलेगी। जिस गाय के दूध से लेकर उसके गोबर,गोमुत्र तक को पावन माना जाता है हर पूजा में इस्तेमाल होता है...उस " कामधेनु या नंदी " के रूप का ऐसा अपमान...कैसे विधाता बर्दाश्त करेंगे।

जो भी गौशाला चलाने वाले(जो गाय-बछड़े को निकाल देते हैं) या अपने कैम्पस,गेट,दुकान से गाय-बछड़े को खदेरने वाले लोग हैं....वो एक बात समझ लें कि सरकार,कानून की तरफ से उन्हें दंड मिले या न मिले...पर ऊपर वाले की तरफ से जरूर मिलेगा।

मैं जब भी सड़क पर गाय-बछड़े को कचरे में खाना खोजते देखती हूँ तो मेरी आत्मा तड़प उठती है,हमसे जितना हो सके    " इस बेजुबान माँ " की सेवा करनी चाहिए,...तभी कहना हम    " हिन्दु " हैं...

मुझसे जहाँ तक हो पाता है मैं इन बेजुबानों की सेवा करने की कोशिश करती हूँ....एक बार तो मैंने एक गाय के मुँह से लम्बा कपड़ा अपने हाथों से खींचकर बाहर निकाला था,जिसे वो चबा रही थी...,मुझे लगा था कि अगर वो लम्बा कपड़ा चबाकर निगल जाएगी,तो शायद वो मर जाएगी...इसलिए मैंने उसके मुँह से कपड़ा निकाला।वहां मौजूद लोग मुझसे कह रहे थे कि मत जाओ उसके पास,वो अपने सींग से मारेगी...पर मैं नहीं डरी,क्योंकि मुझे एक जान बचानी थी।


नए दुकान की बनी सत्तू वाली लिट्टी हमने नाश्ते में खाई...स्वाद अच्छा था,लिट्टी गर्म थी इसलिए मम्मी और मुझे बहुत टेस्टी लगा...नीचे फोटो डाली है.....


मम्मी ने बनाई सरसो में " बेसन के गट्टे की सब्जी "

" बेसन के गट्टे की सब्जी " मम्मी ने बहुत टेस्टी बनाई,वो भी खड़े गर्म मसाले और सरसो के साथ....मुझे ये सब्जी चावल के साथ ज्यादा पसंद है...इससे खाने का मजा बहुत बढ़ जाता है,मैं नीचे रेसिपी दे रही हूँ...आप भी जरूर ट्राई करें।
रेसिपी----
पहले बेसन में लाल मिर्च पाउडर,धनिया पाउडर,नमक,थोड़ा पीसा गर्म मसाला डालकर अच्छी तरह हल्का पानी देकर "आटे की तरह " गूंथ ले बेसन को,फिर इसे हाथों से हर लोई लम्बा लम्बा कर ले और पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल ले,इससे बेसन अच्छी तरह पक जाता है( बेसन के पानी को न फेंके)....फिर चाकू से अपने मन के हिसाब से कोई भी आकार में काट लें और कढ़ाई में तेल में भून ले....
फिर कढ़ाई से कटे बेसन के टुकड़ों को बाहर निकाल ले प्लेट में....उसे ठंडा होने दें। तब तक कढ़ाई में फिर तेल डाले और सरसों के साथ खड़ा गर्म मसाला का फोड़न डाले..इससे पहले आप हींग या करी पत्ता भी डाल सकते हैं।अब उसमें बारिक कटा प्याज डाले और लाल होने तक भूने,फिर टमाटर डाले,अदरक-लहसून का पेस्ट और साथ में नमक डालकर तीन मिनट तक भूने...उसके बाद इसमें पहले से भूना हुआ बेसन का पीस डाले और कम आंच पर भूने।
जब अच्छी तरह भून जाए तो बस "बेसन का पानी" ( जिसमें बेसन उबाला था) डाले और उबाल आने का इंतजार करें,सब्जी में उबाल आते ही इसमें कसूरी मेथी या धनिया का पत्ता डाले और गैस पर से सब्जी को उतार लें।

आज की टैग लाइन रही " गौ सेवा परम धर्म "
आज के लिए बस इतना ही,कल फिर मिलते हैं....
------ अनुगुंजा








 

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