आज सुबह की शुरूआत भी बारिश से ही हुई,पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है...हमारी कॉलोनी,कैम्पस...ही क्या पूरा शहर ही जलमग्न हो गया है।मोतीझील,मिठनपुरा,आमगोला ....सब इलाका पानी की तबाही झेल रहा है,प्रशासन हमेशा की तरह मौन है...उसके पास कोई जवाब नहीं है।इस जलजमाव के कारण रोजाना सड़कों पर दुर्घटनाएं घट रही है,लोग घायल हो रहे हैं..मर रहे हैं...पर " सब ठीक है,काम चल रहा है " की तर्ज पर जनता के सेवक चल रहें हैं।इस गंदे पानी से शहर में महामारी फैलने का खतरा बहुत बढ़ गया है,मच्छरों का प्रकोप तो अपने चरम पर है...शाम-रात की कौन कहे...दिन में भी मच्छर बैठने नहीं देते...काट-काट कर पूरे शरीर का खून चूस कर जख्मी कर देते हैं।आज की बारिश ने तो हद ही पार कर दी...इतनी जोरदार हो रही थी कि न तो मेरे घर काम करने वाली बाई आई और न पेंट करने वाले पेंटर लोग....हम लोग भी उनकी मजबूरी समझते हैं जब घर के अंदर हमें इतनी तकलीफ हो रही है तो फिर उन्हें तो बाहर से आना है।आज पूजा वाले कमरे में पेंट का दूसरा कोट नहीं हो सका,सारा ,सामान ऐसे ही पड़ा रहा।मम्मी और मैंने मिलकर सारे बर्तन धो डाले...चौका (रसोईघर) की साफ सफाई भी कर ली।घर में आज झाड़ू नहीं पड़ा,क्योंकि पूरा घर पानी पानी था...हमारा घर पुराना है इसलिए बारिश में घर की छतो से पानी का टपकना शुरू हो जाता है,इससे पेंट खराब होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।आज की बारिश ने तो मन को एकदम खराब कर दिया....इस बारिश पर बहुत गुस्सा भी आ रहा था।
इतनी बारिश में आज कोई सब्जी बेचने वाला भी नहीं आया और हमारे घर में प्याज खत्म हो गया था....अब समस्या बहुत बड़ी थी कि बिना प्याज के सब्जी कैसे बनेगी? फिर मैंने सोचा कि कुछ भी असंभव नहीं है....और लग गई बिना प्याज के बेसन की सब्जी बनाने में। कड़ी पत्ता,हींग,जीरा का फोड़न डाला सरसो के तेल में...फिर टमाटर,अदरक-लहसून का पेस्ट डाला,फिर हल्दी..मिर्चा पाउडर,धनिया पाउडर,काली मिर्च पाउडर डालकर खूब भूजा...एकदम लाल कर लिया,और फिर उसमें पानी डाला...और इंतजार करने लगी पानी में उबाल आने का।उबाल आने के बाद पहले से तैयार बेसन के गट्टे को उसमें डाल दिया।और हां....सब्जी बन जाने पर उसमें कसूरी मेथी का पत्ता और धनिया का पत्ता भी डाला। घर में सबको बिना प्याज के बेसन की सब्जी बहुत अच्छी लगी।
मुझे लगता है कि भगवान ने इंसान को ऐसा बनाया है कि वो हर परिस्थिति में अपनेआप को ढाल सकता है,लेकिन इंसान अपना सबसे बड़ा ये गुण भूल जाता है और भगवान से ही शिकायत करने लगता है।
अरे!!!!! भाई....आप सब ये सोच रहे होंगे कि टाइटल में डाला " टोटका काम कर गया "...और अभी तक केवल बारिश,बिना प्याज की सब्जी...इंसान...आदि की क्या क्या बात कर रही है......तो भाईयो और बहनो,मैं आ रही हूँ टाइटल की ओर....
आज की बारिश से मन खिन्न था मेरा,मैं चाहती थी कि किसी भी तरह ये बारिश रूक जाए....पर मैं कोई " चीन(china) " देश तो हूँ नहीं,जो एक रॉकेट छोड़कर बारिश रोक दे..,मेरी मम्मी ने बारिश रोकने का एक टोटका बताया,बहुत मजेदार टोटका था...शायद आप सबने भी सूना होगा या किया होगा।
मम्मी ने बताया कि छत पर " एक महिला और एक पुरूष " का चित्र बनाओ,जिसे " भाभो( छोटे भाई की पत्नी) और भैसुर(जेठ) " माना जाता है...चित्र में उन दोनों का हाथ मिलाया हुआ बनाया जाता है और उस चित्र को तीन बार लांघते हुए ये बोला जाता है कि " भाभो-भैसुर भींग रहें हैं...हे इंद्र भगवान बारिश रोक दें "....ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से बारिश रूक जाती हैं,क्योंकि हमारे समाज में भाभो अपने भैसुर का बहुत सम्मान करती है,उनके सामने बैठती तक नहीं है...बहुत जगह भैसुर,भाभो की तरफ सीधी नजर से देखते भी नहीं हैं।ऐसे में अगर इनका हाथ मिलाया हुआ चित्र,वो बनाए जिसका जन्म ननिहाल में हुआ है तो बारिश रूक जाएगी। इसके पीछे क्या तर्क है ये मैं नहीं जानती......चुकी मेरा जन्म ननिहाल में हुआ है इसलिए बारिश में भींगते हुए मैंने अपनी छत पर ये चित्र बनाया.....मैं इस तरह का टोटका जैसी मान्यता नहीं मानती,पर वो कहते हैं न कि मरता क्या न करता.....मुझे बारिश रोकवानी थी इसलिए किया।
पता नहीं ये कौन सा ज्ञान,विज्ञान या मान्यता है...इस टोटके के बाद बारिश रूक गई...मुझे हैरानी हो रही थी कि ऐसा कैसे हुआ.....ये कौन सा कॉनटैक्ट है जो वर्षा रोक देता है।मुझे पता नहीं....अगर आपके पास कोई जानकारी हो तो जरूर बताएं।
चलिए कल मिलते हैं....
----- अनुगुंजा
यही चित्र मैंने बनाया था बारिश रोकने के लिए...देखिए इसे और खूब आनंद ले...

Anu di kal bhi please
जवाब देंहटाएंजरूर....
हटाएंMain v try karungi ye totka🙄
हटाएंजरूर करें....आखिर हमारे बड़े बुजुर्ग कुछ सोचकर ही ऐसा करते होंगे।आपका बहुत धन्यवाद मेरे ब्लॉग को पढ़ने के लिए।मैं रोज जीवन के लम्हों को समेटकर अपने ब्लॉग में लिखती हूँ...तो जब समय मिले तो मेरा ब्लॉग पढ़े और शेयर करें।
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