कल पूरी रात भयानक किस्म की लगातार बारिश हुई साथ ही साथ तेज बिजली का कड़कना-चमकना भी जारी रहा....रात ऐसा लग रहा था कि कुछ अनहोनी होकर रहेगी,हम सभी प्रकृति के इस रौद्र रूप को देखकर डरे हुए थे....लगातार हम सब भगवान का नाम ले रहे थे और ये प्रार्थना कर रहे थे कि वो हमारे परिवार की रक्षा करें।अक्टूबर में ऐसी बारिश मैंने कभी नहीं देखी,न्यूज पेपर में आया कि ऐसा शाहिन चक्रवात के कारण हुआ.....कल रात की बारिश को देखते हुए मम्मी ने सिर्फ रोटी बनाई और दिन की ही सब्जी को गर्म कर हम सबने रात का खाना खाया।हमें मम्मी ने सिखाया है कि हम सबको परिस्थिति के हिसाब से ही चलना चाहिए...मम्मी कहती है... "कभी घृत घना, कभी मुठ्ठी भर चना, कभी वो भी मना" ...मतलब हमें कभी घी में बना पकवान मिलता है,कभी थोड़ा सा चना मिलता है और कभी कुछ भी खाने को नहीं मिलता है।इसलिए हर कुछ ईश्वर की कृपा समझकर उसे स्वीकार करना चाहिए।तो हम सबने बड़ी खुशी के साथ रात का खाना खाया पर बिजली की चमक से डर हुए भी थे....खासतौर से मेरी मम्मी जो बिजली चमकना देखते ही अपने दोनों हाथों से अपने कानों को बंद कर लेती है,वो इससे बहुत डरती है।
सुबह का स्वागत भी भीषण बारिश से ही हुआ....मेरा पूरा कैम्पस पानी से भर गया...मेरा कॉलोनी भी पानी से डूब गया...तो हम कह सकते हैं कि हमारी आज की सुबह पानी-पानी थी।लेकिन सुबह में बहुत दुखद खबर हमें सुनने को मिली,मेरे मामा के बचपन के दोस्त( जो हमारी कॉलोनी में ही रहते हैं) उनका देहांत बिजली के झटके( करेंट) लगने से हो गया...असल में उनके घर में घुटना भर पानी लग जाता है और वो सुबह सुबह पानी का मोटर चलाने गए और उसी में उन्हें करेंट मार दिया और वही उनकी मौत हो गई। इस खबर का सबसे बुरा असर मेरे मामा पर पड़ा,क्योंकि कल रात नौ बजे ही वो उनसे मिले थे और आज ये अनर्थ हो गया।किसी ने सही कहा है कब,क्या हो जाए,कुछ कहा नहीं जा सकता है...देखते ही देखते एक भरा-पूरा परिवार उजड़ गया।भगवान मृत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को ये दुख सहने की शक्ति दे।
कल रात और आज सुबह की बारिश संग बिजली का तड़कना...सचमुच मामा के दोस्त पर बिजली गिरने जैसा साबित हुआ,हम सबको बहुत दुख हो रहा है लेकिन साथ ही साथ हम सबको कल रात की प्राकृतिक आपदा को देखकर लग रहा था कि कुछ गलत होने वाला है,जैसे कुदरत हमें सचेत कर रही थी। मेरे भाई भास्कर ने भी कहा कि उसे भी इस बिजली का चमकना देखकर लग रहा था कि कुछ गलत होगा....लेकिन फिर भी जिन्दगी चलने का नाम है,तो हमारी सुबह भी आगे बढ़ती है.....
इस बारिश में भी सब्जीवाला अपना ठेला लेकर आया और मैंने पचास रूपये बैगन लिया...मेरा कैम्पस छोटा मोटा समुद्र जैसा लग रहा था जिसमें हर वाहन के आने-जाने पर लहर उठ रही थी....लेकिन ये समुद्र बहुत गंदा था,क्योंकि इसमे पूरा नाले का पानी,कूड़ा-कचरा भरा था...बदबूदार गंदा पानी अनेक बीमारी को निमंत्रण दे रहा था...क्योंकि हमारी कॉलोनी के नाले की सफाई कभी नहीं होती है और सड़क भी टूटा-फूटा है...हमारी वार्ड पार्षद सोई ही रहती है,जरा भी सजग नहीं है अपने काम में।
मैंने बैगन की सब्जी बनाई...जो सबको,खासतौर से मेरी मामी को बहुत पसंद आई...जब आपके काम की सराहना होती है तो बहुत खुशी मिलती है।आज की बैगन की सब्जी में मैंने पहली बार आमचूर,कड़ी पत्ता भी डाला और साथ मैगी का सब्जी मसाला भी डाला...हींग के छौंक ने बैगन में चार चांद लगा दिया।आज मैंने जाना कि कसूरी मेथी पत्ता भी किसी भी सब्जी को टेस्टी बना देता है।तो चलिए अच्छी बन गई " बैगन की सब्जी ".....
अभी शाम के सवा सात बज रहे हैं पर अभी भी बारिश हो रही है...इससे मेरे घर की पेंटिंग पर बुरा असर पड़ रहा है।अब तो इंद्र भगवान से यही प्रार्थना है कि अब रोक दे बारिश को,बहुत हुआ।
चलिए...फिर कल मिलते हैं....
----- अनुगुंजा
मेरे शहर में हो रही है तेज बारिश और मैं आपको राजस्थान का दर्शन करा रही हूँ...जहां सूखा पड़ता है और रेत ही रेत है....ऊँट की ही सवारी मशहूर है...इस पेंटिंग को मैंने बनाया है...ये मेरी oil painting है....

👍👍
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