शनिवार, 25 सितंबर 2021

शनिवार का सूर्य

  अरे !!! भाई-बहन आप ये मत सोचने लग जाए कि मैं आपसे शनिदेव या सूर्य देव की बात करने जा रही हूँ....या पूजा-पाठ पर कुछ कहने जा रही हूँ....

आज शनिवार का दिन है,सुबह जब मैं उठी तो देखा की नाउम्मीदी के बादल छट गए थे...और आशा की नई सुबह की शुरूआत हो चुकी थी।सूर्य देव अपनी चमक से पूरी धरती को रौशन कर रहे थे....मन में उमंग और उत्साह ये दृश्य देखकर ही आ गया था।

आज मन में अचानक आया कि आज बेसन की सब्जी बनाते हैं,तो फिर क्या मम्मी और हम मिलकर शुरू हो गए ' मिशन बेसन की सब्जी ' को पूरा करने....तभी एक गड़बड़ हो गई,दही थोड़ा ज्यादा पड़ गया और सब्जी में थोड़ा खटापन आ गया....ये छोटी सी गड़बड़ी मुझे जीवन चक्र में घटने वाली कुछ नकारात्मक बात की तरह लगी,जब हम बहुत दुखी हो जाते हैं तो सब बुरा दिखने लगता है और जीवन में खटास आ जाती है.....लेकिन मेरी हर परेशानी को मेरी मम्मी पल भर में दूर कर देती है तो बस आटा का गोली बनाकर सब्जी में डाला और सब्जी का खटास दूर कर दिया।एक मामूली से आटे के गोले ने बिगड़ा काम बना दिया...

असल में हमारे जीवन में परेशानी ज्यादा कठीन नहीं होती है वो बहुत मामूली होती है ये तो हमारी नकारात्मक सोच होती है जो राई को पहाड़ बना देती है....हमें ऐसे वक्त जरूरत होती है उम्मीद के उसी आटे के गोले के जो जीवन के स्वाद को ठीक कर दें।

तो बस यही रहा आज का शनिवार का सूर्य....जो एक सबक दें गया...

शाम होने को है...और हम सब बैठ गए है " चाय " की चुस्की लेने...वो भी पूरे परिवार के साथ....हमारे पास हमारा प्यारा      " छोटू " भी है...अरे !!! छोटू से तो आपको मिलवाया ही नहीं,वो तो हमारे परिवार का सबसे मुख्य सदस्य है...वो है बिल्ला,जो अपाहिज है पर हमारे घर की मुस्कान है।

चलिए फिर मिलते हैं.....

------------अनुगुंजा





2 टिप्‍पणियां:

Please do not enter any spam link in the comment box.

जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...