रविवार, 26 फ़रवरी 2023

चाह जन्मदाता की

माँ-बाप हमारे जीवन की न सिर्फ बुनियाद होते हैं बल्कि ये ही हमारे जीवन की सच्ची खुशी होते हैं,क्योंकि इनके जीवन का सार हम ही होते हैं।

इससे प्यारी मुस्कुराहट मैंने न देखी,

ऐसी निर्मल मासूमियत कहीं न पाई....

मम्मी-पापा जब बन जाते हमारे दोस्त,

तब कहीं बाहर घूमने की चाह हमें न भाए....

घर ही बन जाता आनंद की पाठशाला,

क्योंकि यहीं गुरु संग दोस्त हमें मिल जाए....

माँ-बाप होते सच्चे मित्र किताबों जैसे,

इनके हर पन्नों से हमें जीवन-दर्शन सिखाए.....

हर कठिन डगर पर उम्मीद के फूल खिलते

जब साथ हो हमारे जन्मदाता की दुआए.....

बहुत किस्मत से मिलता माता-पिता का आशीर्वाद,

इनकी प्रार्थनाओं ने ही हमें कर्म करने योग्य बनाए.....

सम्मान संग प्रेम देते रहें हम अपने माँ-बाप को,

चारों धाम संग पावन गंगा का मिले पुण्य यहीं मिल जाए।


वर्तमान समय बहुत व्यस्त समय है,यहां सबकुछ देने के लिए है, बस देने के लिए समय ही नहीं है अपने माता-पिता को....यही सबसे बड़ी समस्या है क्योंकि हमारे मम्मी-पापा को हमसे हमारे थोड़े से समय के अलावा हमसे कुछ नहीं चाहिए। माँ-पापा के साथ बैठकर एक कप चाय पीना,हमारे लिए बहुत मामूली बात हो सकती है पर उनके लिए ये अनमोल पल होता है,हर चाय की एक चुस्की के साथ वो अनेको जीवन जी लेते हैं या ये कहें सारी खुशीयाँ समेट लेते हैं।

किसी Mother's day या father's day का इंतजार मत करो,बल्कि हर दिन थोड़ा सा समय अपने जन्मदाता को दे दो...यही उनका सबसे बड़ा गिफ्ट होगा।

समय के महत्व के आगे माँ-बाप के महत्व को कम न पड़ने दो..... पैसा,सहूलियत, सुख-सुविधा,ऐशो आराम....ये सब हल्का तब हो जाता है जब हमारे माता-पिता अपने घर की खिड़की या बालकोनी या छत से आसमान को निहारते हैं या सड़क पर चलने वाली गतिविधि को चुपचाप बस देखते हैं या टीवी या किसी पार्क को अपने मन को बहलाने का जरिया या साधन बना लेते हैं। 

कोई भी पार्क, टीवी....औलाद की कमी पूरी नहीं कर सकता,ये तो बस उनका वक्त के साथ किया गया एक समझौता होता है....जिसे नाम दिया जाता है " बदलाव " का

अनुगुंजा



 

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