भूख लगती है इन्हें भी,
गला सूखता है इनका भी....
केवल लोगों के पत्थर खाने को ये नहीं बने,
क्रोध उतारने के लिए ईश्वर ने इन्हें नहीं चुने.....
हक इनको भी है जीवन जीने का,
खुश होकर इंसानों के प्यार को पाने का....
फिर क्यों इन्हें मनुष्य तड़पाते,
जानबूझकर मरने को छोड़ जाते....
क्या कसूर है इनका, इन्हें भी मालूम नहीं,
किस गुनाह पर मिलती सजा,ये अबतक जाने नहीं.....
मासूम आँखे बस निहारे अपने मददगार को,
अनबोलते जीव मांगे सहारा इंसानियत भरे प्यार को.....
जब भी हम सड़कों पर निकलते हैं तो न जाने कितने अनेकों बेजुबान जीव (गाय,कुत्ते,बिल्ली आदि) मिलते होंगे हमें, पर हम उनकी तरफ देखते भी नहीं होंगे,क्योंकि हम अपने कामों में व्यस्त रहे होंगे।
अब दो मिनट यहीं रूकते हैं और एक बार उनकी जगह अपने को रखकर सोचते हैं, जहां हम कई दिनों से भूखे-प्यासे हो,और एक उम्मीद में सबकी तरफ देख रहे हो कि कोई मेरी मदद करेगा पर हर कोई आगे बढ़ जाता है....कैसा महसूस होगा हमें? कितनी निराशा मिलेगी,कितना दुख होगा।
बस यही महसूस करना आज का इंसान लगभग भूल चुका है और स्वार्थ की चादर को रोज खींचकर बढ़ाता जा रहा है। हम ही हम में वो पूरी तरह डूब चुका है। यही कलयुग का सबसे बड़ा श्राप है।
आज लोग अगर जानवरों के प्रति प्यार दिखाना चाहते हैं तो महंगा कुत्ता खरीद लेते हैं और खुद को इंसानियत का मसीह समझ लेते हैं पर वो ये भूल जाते हैं कि दिखावा और असलियत में फर्क होता है। अगर नियत साफ है तो सड़क पर भटकने वाले कुत्तों को भी पाला जा सकता है,उसे अपने घर और दिल में जगह दी जा सकती है पर ऐसा होता नहीं।
अगर कोई आवारा कहा जाने वाला कुत्ता किसी को काटता है या भयानक हमला करता है,तो सब कहते हैं कि उस कुत्ते को मार दो....मेरा बस इतना कहना है कि उस बेचारे को पागल किसने बनाया? किसने उसे इतना खुंखार बनाया? उसके साथ ऐसा क्या हुआ,जो कोई न्यूज चैनल न दिखा सका?
इस सबका एक ही जवाब है वो है........
" इंसान और उसकी क्रूरता "
हर जीव में बर्दाश्त करने की एक सीमा होती है जिसके पार इंसान हो या जानवर अपना आपा खो ही देता है। एक चींटी भी बचाव में काटती है.......
लेकिन ये अनबोलते जीव अपना पक्ष रख नहीं सकते,इसलिए मानव की सभा में ये अपराधी सिद्ध हो जाते हैं।जिसको जो मन में आता है वो अपना क्रोध व्यक्त करता है और ये बेजुबान सोशल नेटवर्किंग साइट पर आकर अपना दर्द नहीं बता पाते,बस मूक बने रहते हैं।
अनुगुंजा

