रविवार, 12 जून 2022

मम्मी के जन्मदिन का तोहफा

 

है आज जन्मदिन मेरी मम्मी का,

जिसके लिए मांगू मैं दुआ लम्बी उम्र का....

चेहरे पर खिली रहे मुस्कुराहट की लकीरे,

उसकी वजह से ही है बनती मेरी तकदीरे....

मम्मी की खुशी की अरज करूं मैं भगवान से,

उसके ऊपर हो रहमत की बारिश,प्रभु दरबार से....

हमेशा मेरा हाथ पकड़े चलती रहे मेरी मम्मी,
मेरी कामयाबी पर उसकी आँखों में रहे खुशी की नमी....
मेरी सफलता है केवल मेरी मम्मी का आशीर्वाद,
वो है मेरे लिए ईश्वर का सबसे अनमोल उपहार....
मेरी खुशी की खातिर अपार कष्ट में भी चलती,
मेरी मम्मी मेरे लिए अपने पीड़ित पैर घसीटती....
मेरी हर धड़कन बस पुकारे मेरी मम्मी को,
मेरी आँखें हर पल देखती रहे मेरी मम्मी को.....
हूँ मैं बहुत सौभाग्यशाली जो मिली ऐसी माँ,
मुझे अपने कलेजे से लगाकर पाली है मेरी माँ....
आज भी मैं उसके गोद में रखती अपने सिर को,
अपार सुख,शांति का एहसास मिले उस पल को....
मेरे बालों में जब अपनी अंगुली फेरती मेरी माँ,
तब लगता मानो मैंने जीत लिया सातों आसमां....
बड़ा अनोखा है मेरा और मेरी मम्मी का नाता,
कई जन्मों में भी इतना प्यार कोई किसे न दे पाता....
अपनी आखिरी सांस तक करती रहूं अपनी माँ की सेवा,
श्रवण कुमार न सही,पर केवल अपनी मम्मी की बेटी बनकर रहूं सदा......
                  Love you mummy
                         अनुगुंजा





रविवार, 5 जून 2022

सूखता कुआँ

 

Zee news के DNA report में राजस्थान के किसी गांव में सूखे कुएं से पानी निकालने वाली खबर पर आधारित-----


"पर्यावरण बचाओ"  का लगता बहुत नारा,

लेकिन आजतक रूके न जलसंकट का चढ़ता पारा....

बूंद-बूंद पानी को तरसते है कुछ लोग,

पानी की त्रास में सूखे कुएं में उतरते लोग....

जलसंकट की इस भीषण हाहाकार से धरती हिली,

सूखे कुएं में पानी खोजते केवल महिला ही दिखी....

जीवन को अपने खतरे में डाल ये बेटियां उतरती,

अपने चुल्लू भर पानी से मटके-घड़े को भरती....

जलसंकट पर भी पुरूषप्रधानता की धाक दिखी,

घर बैठे पुरूष और कुएं में उतरकर पानी लाए नारी....

दुर्बल और सबल के बीच है पानी की बड़ी खाई,

कोई नाचे पानी से, तो कोई बहाए आँखों से खारी....

हमारी रूह तक है कांप जाती, देख ऐसा भेदभाव,

लेकिन हर हाल में चलना है इंसान का स्वभाव.....

          अनुगुंजा


जन्मदिन मम्मी का

  अगर हो सकता तो, मैं तारें तोड़ लाती, तेरी पैरों की पायल में सजा डालती....  कदमों में "माँ" तेरी जन्नत बसती है मेरी, तेरी हर आहट ...