रविवार, 24 अप्रैल 2022

माँ

 

" माँ " शब्द में है समाया ये संसार,                                   
 
जाने क्यों इस शब्द को सुनते ही आते आंसू ....               

आंसुओं में भावनाओं का सागर है " माँ ",  
 
इस रिश्ते के वर्णन में नौ महीने भी कम पड़ जाते....  

" माँ " की गोद में सिर रख पाते हैं हम सुकून,                           
ऐसी शांति स्वर्ग में भी नहीं है मिल पाती....                   

हमारे बालों में जब " माँ " अपनी अंगुली है फेरती,                    
चारों धाम का दर्शन एक पल में है मिल जाता....               

 इस दुनिया में केवल हमारे लिए है सोचती " माँ ",                 

उसकी पूरी जिन्दगी हमारे चारों ओर है घूमती....           

हमारी तकलीफ को बिना बोले " माँ " है सुन लेती,               

उसके हाथ केवल हमारे लिए दुआ में है उठते....          

भगवान से भी हमारे लिए है लड़ जाती " माँ ",                   

अपने लिए कभी कुछ नहीं है मांगती " माँ "....                  

इस जहान में खुशनसीबों को है मिलता " माँ " का साथ,  

 किस्मत वाले ही थाम पाते " माँ " का हाथ                       

 " माँ " के कंधों पर हमारा बचपन जीवन अंत तक खेलता,        
 हमारा भार भी " माँ " को मुस्कुराहट ही दे जाता....        

कभी नहीं थकती है " माँ ",                                          

अपने बच्चे के आँखों में खुद को देखती है " माँ "....

अनुगुंजा

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