" माँ " शब्द में है समाया ये संसार,
जाने क्यों इस शब्द को सुनते ही आते आंसू ....
आंसुओं में भावनाओं का सागर है " माँ ",
इस रिश्ते के वर्णन में नौ महीने भी कम पड़ जाते....
" माँ " की गोद में सिर रख पाते हैं हम सुकून,
ऐसी शांति स्वर्ग में भी नहीं है मिल पाती....
हमारे बालों में जब " माँ " अपनी अंगुली है फेरती,
चारों धाम का दर्शन एक पल में है मिल जाता....
इस दुनिया में केवल हमारे लिए है सोचती " माँ ",
उसकी पूरी जिन्दगी हमारे चारों ओर है घूमती....
हमारी तकलीफ को बिना बोले " माँ " है सुन लेती,
उसके हाथ केवल हमारे लिए दुआ में है उठते....
भगवान से भी हमारे लिए है लड़ जाती " माँ ",
अपने लिए कभी कुछ नहीं है मांगती " माँ "....
इस जहान में खुशनसीबों को है मिलता " माँ " का साथ,
किस्मत वाले ही थाम पाते " माँ " का हाथ
" माँ " के कंधों पर हमारा बचपन जीवन अंत तक खेलता,
हमारा भार भी " माँ " को मुस्कुराहट ही दे जाता....
कभी नहीं थकती है " माँ ",
अपने बच्चे के आँखों में खुद को देखती है " माँ "....
अनुगुंजा

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