आज का पूरा दिन बहुत व्यस्त रहा...ब्लॉग लिखने का बिलकुल समय नहीं मिला....जब घड़ी की तरफ देखा तो रात के साढे आठ बज रहे थे,तो सोचा कुछ लिखा जाए....
घर में पेंटिंग का काम चल रहा है तो पूरा घर अस्त-व्यस्त है...सब सामान किसी मछली बाजार की तरह बिखरा पड़ा है....जिसे बाद में हमें ही ठीक करना होगा,पेंटिंग के बाद घर ठीक करने के ख्याल से मन कांप जाता है पता नहीं कैसे सब काम होगा....लेकिन इस सब में एक बात बड़ी अच्छी लगती है वो है नए पेंट की खुशबू....उम्मीद करती हूँ आपको भी इसकी महक अच्छी लगती होगी...जब घर की दीवारों पर नया रंग चढ़ता है तो पूरे घर का लुक ही बदल जाता है...सब बहुत सुंदर लगने लगता है....
मेरे घर में जो पेंटर काम कर रहे हैं उनके मुँह में हमेशा गुटखा-पान मसाला भरा रहता है...पुड़िया खोलते हैं और सीधे मुँह में डाल लेते हैं....एक अजीब-सी बदबू फैल जाती है...मैंने देखा कि जो पुड़िया वो फाड़ते हैं उसपर कैंसर की चेतावनी संग मुख कैंसर की फोटो भी होती है,लेकिन इसके बावजूद वो खाते हैं और मौत को गले लगाते हैं। मैंने उनसे पूछा कि वो ऐसा क्यों करते हैं,जानबुझकर कैंसर को बुलावा क्यों देते हैं...तो उन्होंने बस यही कहा कि क्या करें " अमल(आदत)" है...छूटती ही नहीं।मैंने बहुत समझाने की कोशिश की...उनके परिवार के उजड़ने की बात भी कही...पर कोई फायदा नहीं हुआ।
मुझे समझ में नहीं आता कि लोग जानबुझकर मौत को गले क्यों लगाते हैं...गुटखा-पान मसाला बनाने वाली कंपनी पैकेट पर चेतावनी लिखकर,कैंसर की फोटो लगाकर अपना पल्ला तो झाड़ लेते हैं...लेकिन मरता तो इंसान ही है....बिहार में गुटखा,तंबाकू,पान मसाला,शराब बैन है पर फिर भी इसकी कालाबाजारी चल रही है और ये जहर बिक रहें हैं...इसकी दोषी जितना सरकार,प्रशासन है उतना ही आम जनता भी है।
चलिए...तो आज के लिए बस इतना ही...कल फिर मिलते हैं...एक नए अनुभव को लेकर...
------- अनुगुंजा

Very nice 👌👍
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