" एक बार हो गई जंग रात-सवेरा में,
ना-उम्मीद और उम्मीद में सिर्फ "ना" का फर्क है पर ये फर्क बहुत बड़ा है.....जब भी अंधेरे-उजाले, रात-दिन, उम्मीद-नाउम्मीद में जंग होती है तो भले ही ऱोशनी अंधेरे की तरह चिल्लाए नहीं...पर उसकी एक खामोशी वाली मुस्कुराहट अंधेरे का वजूद हिला देती है।
हमारे जीवन में हम बहुत जल्दी नकारात्मक हो जाते हैं और समझते हैं कि सब खत्म हो गया है....पर ये हमारा सिर्फ अंधेरे का भ्रमजाल है जो हमें हारने पर मजबूर करता है।
आप सभी को दूरदर्शन पर आने वाला टीवी शो "शक्तिमान" तो याद होगा न....उसमें अंधेरे का राजा किलविश हमेशा बोलता था " अंधेरा कायम है ".....ये अंधेरा कोई दानव नहीं है बल्कि हमारे अंदर की मरती सकारात्मकता और जीवित होती नकारात्मकता है...
जिन्दगी है तो गिरना-उठना और फिर गिरना चलता रहता है....इससे निराश या हतोत्साहित होने की कोई जरूरत नहीं है....बल्कि हमें हमारे अंदर एक निडर,बहादुर,सच्चा और सकारात्मक योद्धा को हमेशा जीवित रखना है जिसके हाथों में हौसलों की तलवार हो,जो किसी भी हाल में हार न मानने की ढाल रखता हो....बस फिर देखें कि जिन्दगी क्या कमाल की लगती है।
आजकल मैं बहुत ज्यादा व्यस्त हूँ...अपनी book editing, proofreading वाले काम को लेकर..अब तो मैंने दो online course करना शुरू किया है जो डिजिटल मार्केटिंग और creative writing का है....तो उसी का online क्लास करते करते समय बीत जाता है....पर अब मैं कोशिश करूंगी कि रोज blog लिख सकूं....
आज हमारे यहां कटहल-आलू की बहुत टेस्टी सब्जी बनी...जिसकी रेसिपि फिर किसी दिन आपसे शेयर करूंगी।
आजकल हमारे कॉलोनी में लाइट बहुत देर तक कटती है...दोपहर को गई लाईट शाम कौन कहे..रात में भी नहीं आती है,अभी शाम के सात बज रहे हैं पर बिजली गुल है.....यही तो हाल है बिहार का....सड़क,बिजली,पानी सबसे लोग त्रस्त...।
मैं अब blog में short story लिखना सोच रही हूँ....आप बताए कि मेरा सोचना कैसा है? और किस विषय पर कहानी लिखनी चाहिए? कमेंट में जरूर बताए...
------ अनुगुंजा